जगदलपुर/दंतेवाड़ा। बस्तर में जल जंगल और जमीन आदिवासी परिवारों की आय का मुख्य साधन है।

यहीं जंगल आदिवासी परिवारों का सहारा बने हुए हैं। इन वनों की देखरेख का जिम्मा वन विभाग का है।

 

लेकिन, वन विभाग के अफसर ही इन आदिवासियों के हक पर डाका डालने पर उतारू हो जाए तो आप

सोच सकते हैं उनकी माली हालत क्या होगी। ऐसा ही एक मामला बचेली रेंज में सामने आया है।

 

दरअसल दंतेवाड़ा जिला बचेली रेंज के अंतर्गत आने वाली गांव भांसी से निकट कमेली एवं नकुलनार

के पास मैलावाड़ा में वन विभाग के लिए कार्य कर रहे मजदूरों को सरकार द्वारा निर्धारित रोजी के

अनुसार उन्हें भुगतान नहीं किया गया है।

 

सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी 280 रुपए तय की गई है परंतु कार्य कर रहे मजदूर लक्ष्मी, गुंडई,

जगदीश एवं शंकर की माने तो उन्हें 200 रूपए रोजी का भुगतान रेंजर द्वारा किया जा रहा है। इस

See also  गुजरात में 25 फरवरी को 'हाउडी मोदी' की तर्ज पर होगा 'केम छो ट्रंप', तैयारियां जोरों पर

संबंध में जब परिक्षेत्र अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई तो कोई जवाब नहीं मिला।

 

बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार ने वनों में रहने वाले आदिवासियों के लिए कई योजनाएं बनाई गई है,

परंतु बचेली सामान्य वन मंडल विभाग द्वारा योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का

कहना है मजदूरी का पूरा भुगतान नहीं किए जाने से उनके सामने रोजीरोट की समस्या पैदा हो गई है।

 

Chhattisgarh से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Twitter पर Follow करें और Youtube  पर हमें subscribe करें। एक ही क्लिक में पढ़ें  The Rural Press की सारी खबरें।

 

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।