नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में अब साल भर से भी कम समय बचा है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला एनडीए अपने सभी पुराने घटकों को जोड़ते हुए बैठक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटा है। वहीं विपक्षी खेमा अभी भी अपने-अपने मुद्दों को लेकर एक दूजे पर तना खड़ा है। ऐसी ही दो राज्यों में सत्ता के आसन पर बैठी आम आदमी पार्टी विपक्षी खेमे की एक बड़ी कड़ी है, लेकिन इसके साथ आने को लेकर पार्टी की अपनी अलग शर्त है। आप दिल्ली में केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ संसद में सभी विपक्षी दलों के आवाज उठाने की शर्त पर ही विपक्षी गुट में जुड़ने की बात कह रही है।


आम आदमी पार्टी को विपक्ष के सबसे बड़े दल कांग्रेस से पूरा भरोसा चाहिए कि वो इस अध्यादेश के खिलाफ सदन में अपने सांसदों को विरोध करने के लिए कहे. वहीं कांग्रेस पार्टी इस अध्यादेश को लेकर दो धड़ों में बंट रही है। दिल्ली कांग्रेस का कहना है कि ऐसा करने पर वो आम आदमी पार्टी के सामने सरेंडर करने की स्थिति में आ जाएंगे और इससे सूबे में उनका वजूद तक खो जाने की संभावना है। वहीं कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व राष्ट्रीय राजनीति को देख इस मामले पर थोड़ा लचीला है।

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कांग्रेस पर AAP को विश्वास नहीं!
इस बाबत कल यानी शनिवार को हुई कांग्रेस के संसदीय मामलों की समिति की बैठक में भी चर्चा हुई। पार्टी के दिग्गज नेता जयराम रमेश ने इस मसले का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी बीजेपी द्वारा चुनी हुई सरकारों के अधिकारों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष हमले के खिलाफ आवाज उठाती आई है। उन्होंने कहा ये आगे भी जारी रहेगा।  हालांकि इस आश्वासन पर भी आम आदमी पार्टी को पूर्ण विश्वास नहीं है।  इसी लिए आम आदमी पार्टी ने आज यानी रविवार 4 बजे पार्टी की संसदीय मामलों की समिति की बैठक बुलाई है।


4 बजे AAP ने बुलाई PAC की बैठक
बेंगलुरु में विपक्षी दलों की बैठक से पहले आम आदमी पार्टी की ये बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में पीएसी के सदस्यों के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि अध्यादेश पर कांग्रेस के स्टैंड से आम आदमी पार्टी की टॉप लीडरशिप नाराजा है। ऐसे में पार्टी पीएसी की बैठक के दौरान बेंगलुरु में होने वाली विपक्षी दलों की होने वाली बैठक में न जाने को लेकर फैसला ले सकती है।

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