मुंबई : पिछले कई दशकों से अगर कोई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के बारे में सोचता था, तो उसके मन में शहर की ‘प्रीमियर पद्मिनी’ टैक्सी की तस्वीर जरूर उभरती थी. आम लोगों के लिए कई दशकों से सवारी का सुगम साधन बनी इस टैक्सी सेवा को ‘काली-पीली’ के तौर पर जाना जाता था, जो इसके रंग को दर्शाता है. शहरवासियों का इस टैक्सी सेवा से गहरा जुड़ाव रहा है और अब लगभग छह दशक के बाद इसकी ‘यात्रा’ समाप्त होने जा रही है. नये मॉडल और ऐप-आधारित कैब सेवाओं के बाद ये काली-पीली टैक्सी अब मुंबई की सड़कों से हट जाएंगी.

1964 में पद्मिनी ने शुरू की थी यात्रा

मुंबई के कुछ लोगों ने मांग की है कि कम से कम एक ‘प्रीमियर पद्मिनी’ को संग्रहालय में संरक्षित किया जाना चाहिए। बता दें कि कुछ साल पहले, ‘मुंबई टैक्सीमेन यूनियन’ ने सरकार से कम से कम एक काली-पीली टैक्सी को संरक्षित करने के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। ‘मुंबई टैक्सीमेंस यूनियन’ के महासचिव एएल क्वाद्रोस ने बताया कि टैक्सी के रूप में ‘प्रीमियर पद्मिनी’ ने अपनी यात्रा 1964 में ‘फिएट-1100 डिलाइट’ मॉडल के साथ शुरू की थी। ये टैक्सी अब याद बनकर रहेगी।

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इसकी वजह ये है कि अब शहर में नये मॉडल और ऐप-आधारित कैब सेवाएं उपलब्ध हैं और इसे लेकर इस काली-पीली टैक्सी को अब मुंबई की सड़कों से हटा दिया जाएगा। बता दें कि मुंबई में . हाल में सार्वजनिक ट्रांसपोर्टर ‘बेस्ट’ की प्रसिद्ध लाल डबल-डेकर डीजल बसों को भी सड़कों से हटा दिया गया था। और इसके बाद अब ये काली-पीली टैक्सी भी सड़कों पर नजर नहीं आएगी।

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