महासमुंद। खरीफ सीजन की खेती-किसानी का कार्य लगभग पूरा हो चुका है जिसके बाद खेतिहर मजदूरों का काम की तलाश में छत्तीगढ़ से दूसरे राज्यों में पलायन करने का सिलसिला शुरू हो गया। प्रदेश के लगभग सभी जिलों से मजदूर काम की तलाश में दूसरे राज्यों के बड़े शहरों में जाते हैं और मजदूरी करते हैं। लेकिन महासमुंद जिला मजदूरों के पलायन में अव्वल है। विडम्बना है कि श्रम व पुलिस विभाग को सब जानकारी होते हुए भी मजदूरों का पलायन लगातार जारी है।

महासमुंद रेलवे स्टेशन पर कुछ मजदूर एक पेड़ के नीचे रात्रि में बैठे थे और सोच रहे थे कि कैसे अपने मंजील तक पहुंचे. पुरुष- महिला व बच्चे मिलाकर इनकी संख्या 15 है और ये बागबाहरा विकासखण्ड के तेन्दूबहरा के रहने वाले हैं. इनको खट्टी नर्रा का मजदूर दलाल तीर्थ पटेल रायपुर भेजा था, फिर रायपुर से इन्हें उत्तर प्रदेश ले जाया जाता, पर महासमुंद पुलिस ने इन्हें रेलवे स्टेशन पर उतारा और इनसे पूछताछ कर भोजन कराया। फिर रेलवे स्टेशन लाकर छोड़ दिया और इनसे कहा कि आप के सरदार से बात हो गई है।

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तेन्दूबहरा के मजदूर आशाराम ने कहा, नियमानुसार अंतर्राज्यीय प्रवासी कर्मकार अधिनियम 1979 के अंतर्गत मजदूर ठेकेदारों को मजदूरों की संख्या सहित पंजीयन कराना होता है और ले जाने से पहले श्रम विभाग को सूची देनी पड़ती है, पर श्रम विभाग के अधिकारियों के कुभकंर्णी नींद के कारण मजदूर ठेकेदार बिना लाइसेंस व सूचना दिए ही हजारों की संख्या में मजदूरों को ले जा रहे हैं। शासकीय रिकार्ड के अनुसार 14 मजदूर ठेकेदारों ने अपना पंजीयन मात्र 2400 मजदूर ले जाने के लिए करा रखे हैं. मजदूर जिस ठेकेदार का नाम ले रहा है। गौरतलब है कि महासमुंद जिले मे हर साल दिपावली के आसपास लगभग हजारों की संख्या में मजदूर पलायन करते हैं. शासकीय रिकार्ड निल बताता है. कोविड काल के रिकार्ड में 65 से 70 हजार मजदूर पलायन कर वापस आये थे। अभी हाल ही में ग्राम नरतोरा के एक दंपति को दूसरे प्रदेश में बंधक बना लिया गया था और वे लोग प्रशासन से गुहार लगा रहे थे।

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