रायपुर। एक ओर जहां शहरी लोगों के दिन की शुरुआत चाय, कॉफी और भारी नाश्ते से होती है,

वहीं दूसरी ओर बस्तर के आदिवासी विशेष प्रकार के मड़िया और मक्का से तैयार पेय का सेवन

करते हैं। इससे उनकी सेहत तो दुरुस्त रहती ही है, दिन भर के काम के लिए ऊर्जा भी मिलती है।

बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इसका सेवन करते हैं। अब बदलते वक्त में शहर में इनकी डिमांड

बढ़ने की लगी है।

 


जय मां काली महिला स्व सहायता समूह तीरथगढ़ के संचालिका ममता ठाकुर बताती हैं कि बस्तर

में जोंदरा (मक्का) और मड़िया पेज सुबह के पेय पदार्थों में शामिल हैं। इनको बनाने के लिए भारी

भरकम सामन की जरूरत भी नहीं पड़ती।

 

 

ममता ने बताती हैं कि कुछ दिन पहले राजधानी में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में स्टॉल लगाया

गया था, जहां शहर के लोगों ने मड़िया और जोंदरा के पेज की खूब डिमांड की। उन्होंने बताया कि

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आदिवासी अंचल में इस पेय का ज्यादा सेवन किया जाता है, लेकिन अब बदलते समय में

स्वास्थ्य का ध्यान में रखते हुए देसी पेय पदार्थ के रूप में इनका प्रचलन बढ़ रहा है। कई लोग

अब सुबह चाय-कॉफी के बजाय मड़िया और जोंदरा से बने पेय पदार्थ पी रहे हैं। डॉक्टरों की

मानें तो यह शरीर के लिए काफी फायदेमंद है।

 

दिन भर के काम के लिए मिलती है ऊर्जा

ममता ठाकुर बताती हैं कि जोंदरा और मड़िया पेज को सुबह खाली पेट पीने से दिन भर शरीर को ऊर्जा

मिलती है। इसे पीकर दिन भर काम कर सकते हैं। पाचन क्रिया अच्छी होती है। सेहत भी दुरुस्त रहती है।

अब तो शहरों में भी मड़िया की डिमांड बढ़ गई है। इससे कई बीमारियों से छुटकारा मिलता है।

क्या है जोंदरा और मड़िया पेज

जोंदरा और मड़िया पेज ऐसे पेय पदार्थ हैं, जिनका आदिवासी अंचल में नाश्ते के रूप में इस्तेमाल किया

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जाता है। जोंदरा मक्के के बीज को कहते हैं। वहीं मड़िया एक प्रकार की फसल है, जिसकी वनांचल में खेती

की जाती है। इन्हें पकाकर पेज बनाया जाता है। ममता बताती हैं कि जोंदरा और मड़िया पेज को बनाने की

विधि बहुत सरल है। जोंदरा पेज बनाने के लिए मक्का के बीज को रात के समय में पानी भिगाना पड़ता है।

इसके बाद उसे उबाला जाता है। फिर इसमें स्वाद के अनुसार नमक और अन्य सामग्री का डाल सकते हैं।

मड़िया पेज बनाने की सारी विधि जोंदरा पेज की तरह ही होती है। दोनों को पानी में पकाया जाता है।

 

बस्तर का प्रमुख पेय

मालूम हो कि बस्तर के आदिवासी चाय, कॉफी से ज्यादा तवज्जो जोंदरा और मड़िया से बने पेय पदार्थ

को देते हैं। वे सुबह उठने के बाद काम पर जाने से पहले एक से दो गिलास जोंदरा या मड़िया पेज पीकर

निकलते हैं। उनके अनुसार इन पेय पदार्थों को पीने से थकान कम महसूस होती है।

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