Citizenship Amendment Act: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर मोदी सरकार नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है। देशभर में इस नए कानून को लागू किया जा चुका है लेकिन, सीएए को लेकर देश के भीतर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के बाद केरल राज्य में भी इस कानून के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। 14 मार्च को केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने घोषणा की कि “केरल में नागरिकता अधिनियम (सीएए) लागू नहीं किया जाएगा।”

इससे पहले दिन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सीएए कानून कभी वापस नहीं लिया जाएगा और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार इसके साथ कभी समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा, “हमारे देश में भारतीय नागरिकता सुनिश्चित करना हमारा संप्रभु अधिकार है। हम इस पर कभी समझौता नहीं करेंगे और सीएए कभी वापस नहीं लिया जाएगा।”

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केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने आज कहा कि केरल नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को लागू नहीं करेगा। उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उनकी पार्टी इंडिया अलायंस में कांग्रेस की सहयोगी है, लेकिन विजयन ने सीएए अधिसूचित होने के बाद कांग्रेस के रुख की आलोचना की। आरोप लगाया कि क्यों राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे ने अभी तक इस मुद्दे पर चुप हैं? विजयन ने कहा कि सीएए पर केरल न तो झुकेगा और न ही चुप रहेगा। विजयन का यह बयान अमित शाह के उस ऐलान के बाद आया है कि राज्यों के पास सीएए लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि नागरिकता एक केंद्रीय विषय है।

सीएए पर तेज हुआ विरोध

एक तरफ मोदी सरकार सीएए कानून को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं है, दूसरी तरफ देश के भीतर इसे लेकर विरोध तेज हो गया है। पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने ऐलान किया था कि वे हर हाल में सीएए लागू नहीं होने देंगे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस कानून को देश के संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया। ममता ने कहा कि इस कानून को लागू करके सरकार लोगों को संप्रदाय के नाम पर बांटने का प्रयास कर रही है। ममता ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे जब तक जीवित हैं, किसी भी कीमत पर राज्य में सीएए लागू नहीं होने देंगे।

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अब केरल में भी विजयन सरकार ने सीएए के खिलाफ अपने तेवर सख्त कर दिए हैं। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गुरुवार को ऐलान किया कि वे राज्य में सीएए लागू नहीं होने देंगे। इससे पहले जब सोमवार को सरकार ने इस कानून पर नोटिफिकेशन जारी किया था। विजयन ने आरोप लगाया था कि लोकसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करके भाजपा सरकार का उद्देश्य ‘लोगों को विभाजित करना, सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काना और बुनियादी सिद्धांतों को कमजोर करना’ है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत आए अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करता है। इस कानून के तहत 31 दिसंबर 2014 के बाद भारत आए अल्पसंख्यक लोगों को नागरिकता दी जाएगी। सोमवार को जब सरकार ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया, तत्काल ही एक पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जिसमें इस कानून के पात्र लोग नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

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