रायपुर। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में पश्चिमी और मध्यवर्ती राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों के पर्यटन मंत्रियों का सम्मेलन गोवा के पणजी में आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने भी भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के पर्यटन विकास की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा करना था। इस मौके पर केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने पर्यटन क्षेत्र में सुधार और नए आयाम जोड़ने के लिए विभिन्न राज्यों से सहयोग और समर्थन का आह्वान किया।

पर्यटन की समग्र प्रगति और विकास हेतु सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा गोवा में पश्चिमी तथा मध्यवर्ती राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र के पर्यटन मंत्रियों के सम्मेलन का आयोजन किया गया। ताकि पर्यटन क्षेत्र के लिए संकल्पना निर्माण तथा विचार-विमर्श किया जा सके और एक साझा विजन तैयार किया जा सके।

इस बैठक में वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित पर्यटक केंद्रों के विकास, वैकल्पिक गंतव्यों के विकास, मार्केटिंग और संवर्धन, पर्यटन क्षेत्र में कनेक्टिविटी, स्वच्छता, व्यवसाय करने की सुविधा और सुगमता में सुधार के साथ-साथ पर्यटन में निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने संबंधी उत्कृष्ट कार्य पद्धतियों को साझा करने पर फोकस किया गया। सम्मेलन में राज्यों के प्रतिष्ठित पर्यटक केंद्र, वैकल्पिक गंतव्य, मार्केटिंग और संवर्धन, व्यवसाय करने की सुगमता और निजी निवेश तथा स्वच्छता तथा पर्यटक सुरक्षा जैसे विषयों को शामिल किया गया।

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केदार कश्यप ने छत्तीसगढ़ में पर्यटन के विकास की संभावनाओं और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटन स्थलों की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा की, साथ ही विकास की राह में आने वाली चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया। मंत्री ने केंद्र से समर्थन और संसाधनों की मांग की ताकि छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सके।

उन्होंने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़, प्राचीन स्मारकों, दुर्लभ वन्यप्राणियों, नक्काशीदार मंदिरों, बौद्ध स्थलों, राजमहलों, जलप्रपातों, गुफाओं और प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्रों से परिपूर्ण राज्य है। हमारा राज्य ऐतिहासिक, पुरातात्विक, धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के साथ गौरवशाली प्राचीन लोक संस्कृति का भी अद्वितीय उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय से भी पूरा सहयोग प्राप्त होता रहा है। हमने अनेक परियोजनाएँ केंद्रीय सहायता से विकसित की हैं। स्वदेश दर्शन में ’ट्रायबल टूरिज्म सर्किट’ विकसित किया है। प्रशाद योजना में डोंगरगढ़ का कार्य अंतिम चरणों में है। इसके पूर्व जगदलपुर, चित्रकोट, भोरमदेव, सिरपुर, रतनपुर, मैनपाट, राजिम, मल्हार आदि स्थलों को केंद्रीय सहायता से विकसित किया है। इसमें राज्य बजट से भी कार्य कराया गया है।

इन विकास कार्यों से और पर्यटन के व्यापक प्रचार-प्रसार से अब यहाँ पर्यटक आने लगे हैं और लगातार पर्यटकों की संख्या बढती जा रही है। आने वाले समय में राज्य में शक्तिपीठ स्थलों का विकास किया जायेगा। हम रोपवे एवं क्रूज पर्यटन के विकास के लिये भी कार्यवाही कर रहे हैं। नयी पर्यटन नीति पर कार्य चल रहा है एवं पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने हेतु भी कार्यवाही चल रही है। हमने केंद्र की होमस्टे गाइडलाइन्स के आधार पर राज्य में ’होमस्टे एंड बेड-एंड-ब्रेकफास्ट’ गाइडलाइन्स तैयार कर जारी की है। इको टूरिज्म पॉलिसी, एडवेंचर गतिविधियों की गाइडलाइन्स, वाटर एक्टीविटी लाइसेंस हेतु गाइडलाइन्स बनाने की भी तैयारी चल रही है।

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राज्य में पर्यटन को और गति देने के लिये हमें पर्यटन मंत्रालय से नयी योजनाओं की स्वीकृति की अपेक्षाएँ हैं। स्वदेश दर्शन 2.0 में चयनित डेस्टीनेशंस बिलासपुर एवं जगदलपुर के लिये भारत सरकार के स्तर से कंसल्टेंट नियुक्त किया जाना है। प्रशाद योजना में सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ का कांसेप्ट प्लान जमा किया जा चुका है जिसकी स्वीकृति अपेक्षित है। अगले प्रस्तुतिकरण के अनुसार आगे भी नयी योजनाएँ तैयार हो रही हैं जिनके प्रस्ताव जल्द ही पर्यटन मंत्रालय को भेजे जायेंगे।

मंत्री ने कहा कि निजी सहभागिता एवं निवेश तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के द्वारा निर्मित किये गए हाइवे मोटलों को संचालन एवं प्रबंधन हेतु लीज पर निजी क्षेत्र को सौंपे जाने की कार्यवाही की जा रही है। जिससे पर्यटकों को पर्यटन स्थलों के भ्रमण के दौरान राजमार्गों पर स्तरीय सुविधा उपलब्ध हो सके।

स्थानीय सहभागिता, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के द्वारा चित्रकोट में वन विभाग के सहयोग से नेचर ट्रेल का विकास किया गया है। इसका संचालन स्थानीय महिला स्वसहायता समुह की महिलाओं के द्वारा किया जा रहा है तथा पर्यटन से उनके लिये अतिरिक्त आय के स्रोत बढ़ाने एवं पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, रहन सहन व खानपान का अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से होमस्टे बेड एंड ब्रेकफास्ट की सुविधा भी प्रदान की जा रही है तथा हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने एवं युवाओं को रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में इंस्टीट्युट ऑफ होटल मैनेजमेंट, केटरिंग टेक्नॉलाजी एंड अप्लाइड न्यूट्रिशन संस्थान का संचालन किया जा रहा है।

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5 वर्षों की योजनाओं से कराया अवगत

केदार ने आगामी 5 वर्षों की राज्य की योजनाएं से अवगत कराया जिसके तहत राज्य के पाँच शक्तिपीठों को जोड़ते हुए सर्किट विकसित करना, स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत बिलासपुर एवं जगदलपुर डेस्टीनेशंस के पर्यटन स्थलों का विकास। प्रशाद योजना के तहत सूरजपुर जिले के माँ कुदरगढ़ी देवी स्थल का विकास कार्य एवं रोपवे की स्थापना शामिल है। इसी तरह नवनिर्मित राजमार्गों एवं बायपास पर पर्यटकों के लिये वेसाइड अमेनिटी विकसित करना। पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय लोगों की सहभागिता को बढ़ावा देना। ईको टूरिज्म, एग्री टूरिज्म, रूरल टूरिज्म एवं माइस (MICE) टूरिज्म को बढ़ावा देना। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की आवासीय इकाईयों को लीज पर निजी क्षेत्र को संचालन हेतु दिया जाना जैसी योजनाएं भी शामिल है।