Parliament Winter session: संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन (20 दिसंबर, गुरुवार) दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। लोकसभा की कार्यवाही महज पांच मिनट के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करते दिखे। सत्ता पक्ष ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया, जबकि विपक्ष ने विजय चौक पर अपनी आवाज उठाई। इस हंगामे के बाद, लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

लोकसभा स्पीकर की सख्त नसीहत

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने सभी सांसदों को निर्देशित किया कि कोई भी राजनीतिक दल या सांसदों का समूह संसद के किसी भी द्वार पर प्रदर्शन नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि संसद की गरिमा सभी सांसदों की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसे सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए। स्पीकर ने चेतावनी दी कि अगर यह आदेश तोड़ा गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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वन नेशन, वन इलेक्शन विधेयक को जेपीसी को भेजा गया

शुक्रवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े दो विधेयकों को 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया। जेपीसी में विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, मनीष तिवारी, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी और साकेत गोखले को सदस्य बनाया गया है। वहीं, सरकार का प्रतिनिधित्व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, संबित पात्रा और अनिल बलूनी करेंगे।

राज्यसभा में भी हंगामा

राज्यसभा में भी हंगामे का दौर जारी रहा, खासकर डॉ. आंबेडकर को लेकर जारी गतिरोध के कारण संसद का माहौल गरमाया रहा। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया। राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई थी। इसके बाद, सभापति ने विपक्ष और नेता सदन को अपने चैंबर में बुलाकर चर्चा करने का ऐलान किया, और फिर कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।

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राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सांसदों से कहा, दुनिया हमारे लोकतंत्र को देख रही है, और हम अपने बर्ताव से अपने नागरिकों को निराश कर रहे हैं। संसद की कार्यवाही में इस तरह की बाधाएं जनता के भरोसे और उम्मीदों का मजाक उड़ाती हैं। यह हमारी ड्यूटी है कि हम मेहनत से लोगों की सेवा करें।