टीआरपी डेस्क। भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालात के बीच आज अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबारने के लिए 2 अरब डॉलर के वित्तीय पैकेज पर चर्चा होगी। भारत इस बैठक में पाकिस्तान को कर्ज देने का विरोध करेगा और उसके आतंकी गतिविधियों के रिकॉर्ड को वैश्विक मंच पर उजागर करने की तैयारी में है।

पाकिस्तान को फिर मिल सकता है राहत पैकेज

हालांकि IMF में अमेरिका और चीन जैसे बड़े सदस्य देशों के समर्थन के चलते, पाकिस्तान को इस पैकेज की मंजूरी मिलने के पूरे आसार हैं, लेकिन भारत का विरोध इस बार भी तीखा होगा। भारत का मानना है कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश को वित्तीय सहायता देना वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है।

भारत उठाएगा सीमापार आतंकवाद का मुद्दा

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि IMF बोर्ड में भारत के निदेशक परमेश्वरन अय्यर पाकिस्तान को लेकर भारत का पक्ष मजबूती से रखेंगे। भारत यह स्पष्ट करेगा कि पाकिस्तान जैसे देश को वित्तीय मदद देना, सीमापार आतंकवाद को अप्रत्यक्ष समर्थन देने के बराबर है।

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उन्होंने कहा, “जो देश पाकिस्तान को आर्थिक मदद दे रहे हैं, उन्हें उसके आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड को गंभीरता से देखना चाहिए। पिछले तीन दशकों में पाकिस्तान को कई बार IMF सहायता दी गई, लेकिन ज्यादातर कार्यक्रम विफल रहे।”

130 अरब डॉलर के कर्ज में डूबा है पाकिस्तान

पाकिस्तान इस वक्त 130 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज में डूबा हुआ है और सिर्फ ब्याज चुकाने में ही उसकी अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है। 2023 में मिले IMF पैकेज के तहत उसे कुछ सुधार देखने को मिले थे, लेकिन हालिया भारत-पाक संघर्ष के कारण उसकी आर्थिक स्थिति और नाजुक हो गई है।

सैन्य टकराव ने बढ़ाई आर्थिक चुनौती

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में 7 और 8 मई को पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर करारा हमला किया। इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। जानकारों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो सकती है।

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