भिंड। गरीबों को मुफ्त राशन देने के लिए सरकार के द्वारा ई-केवायसी कराना अनिवार्य किया गया है। लेकिन, गरीब बुजुर्गों, दिव्यांग और बीमार लोग जो चलने फिरने में अस्वस्थ है, उनका फिंगरप्रिंट नहीं मिल पा रहा है। ऐसे लोग को पिछले तीन माह से सरकार के मुफ्त राशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। फिंगरप्रिंट के अलावा विभाग के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं हैं, जैसे कि आंखों को स्कैन कर उन्हें ई-केवायसी का लाभ दिलाया जा सके। ऐसे लोगों को भरण पोषण जैसे संकटों का सामना करना पड़ रहा है।

9 लाख 95 हजार 370 हितग्राही पंजीकृत

भिंड जिले में 9 लाख 95 हजार से ज्यादा हितग्राही रजिस्ट्रड है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के द्वारा कराई गई ई-केवायसी में 91 हजार से ज्यादा अपात्र मिले। इनमें कुछ लोगों की मौत हो चुकी है, या कुछ शादी के बाद दूसरे शहरों में चले गए हैं। 84 हजार से ज्यादा लोगों की केवाइसी अभी तक नहीं हो पाई है। क्यों कि, इनके फिंगर प्रिंट नहीं मिल पा रहे हैं। राज्य के कुछ शहरों में आंखों की पुतलियों से स्कैन कर पहचान कर लेने वाली स्कैनर मशीन मंगाई गई है। लेकिन, ये सुविधा अभी तक भिंड में उपलब्ध नहीं हो पाई है।

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65 साल की बुजुर्ग महिला का राशन बंद

शहर में कई ऐसे परिवार हैं, जिन्हें सरकार के मुफ्त राशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। खटीक खाने की रहने वाली 65 वर्षीय मीना खान भी इस योजना से अछूती रह गई। शरीर झूक गया है। सीधे से खड़े भी नहीं हो पाती है। जिंदगी भर दूसरे के घरों में कामकाज कर हाथों की लकीरें भी नहीं दिख रही है। झाड़ू-पोंछा और बर्तन माजने से उंगलियों के निशान मिट चुके हैं। जिससे ई-केवायसी नहीं हो पा रहा है। अब बुजुर्ग महिला के सामने खाने का संकट आ चुका है।

भिंड में यह सुविधा नहीं

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि, अभी शहर में कोई एंडवास सुविधा नहीं है, जिससे जरूरत मंद लोगों को इसका सीधा लाभ मिल पाए। फिंगर प्रिंट न मिलने की वजह से उनकी केवायसी पूरी नहीं हो पा रही है। न ही वो पात्रता सूची में अपना नाम एड करवा पा रहे हैं। बड़े शहरों में ऐसी स्कैनर मशीन हैं, जो आंखों की पुतलियों को स्कैन कर पहचान लेती है। पर ये सुविधा भिंड में नहीं है।

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