नया रायपुर। हिन्दी आम जनता की भाषा है। वह स्वाधीनता संग्राम की भाषा है, देश की आजादी की भाषा है। भारत की आजादी के 78 साल बाद भी उपनिवेशवाद और साम्राज्यवादी भाषा के वर्चस्व और प्रभाव के कारण हिन्दी भाषा वह स्थान प्राप्त नहीं कर पायी है,जिसका सपना स्वाधीनता के पहले भारतीय जननायकों ने देखा था। आजादी के बाद भारत के संविधान में हिन्दी को राष्ट्रभाषा और देश की संपर्क भाषा के रुप में मान्यता देने के लिए 15 वर्षो का समय मांगा गया था लेकिन राजनैतिक इच्छाशक्ति के अभाव में 78 साल में भी हिन्दी भाषा को वह सम्मान नहीं मिल पाया है। कलिंगा विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के द्वारा 12 सितंबर को आयोजित “हिन्दी दिवस समारोह” के अवसर पर देश के जाने माने समालोचक और साहित्य अकादमी ,नयी दिल्ली के माननीय सदस्य प्रोफेसर सियाराम शर्मा ने अपने व्याख्यान में यह बातें कही।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चीन, जापान और फ्रांस जैसे विकसित देश अपनी भाषा के दम पर विकसित हुए। कार्ल मार्क्स जैसे विचारक ने अपनी मातृभाषा जर्मन में अपने वैचारिक ग्रंथों को लिखा। मातृभाषा ही संचार का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है लेकिन भारत वर्ष में हिन्दी भाषा जिसे 75 फीसदी से ज्यादा आम जनता बोलती और समझती है, उसे संपर्क भाषा के रुप में विकसित करने की बजाय उधार और गुलामी की भाषा का प्रयोग हमारी गुलाम मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि भारत में दस हजार से ज्यादा भारतीय भाषाएं प्रचलित थी लेकिन आज 6 हजार से कम भाषाएं बची हैं। आदिवासी भाषाएं सिमटती चली जा रही है। हिन्दी की अनेक उपभाषाएं दम तोड़ रही हैं । यह गहन चिंतन का विषय है क्योंकि अपनी भाषा से ही उन्नति और विकास संभव है।

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विद्यार्थियों से संवाद के सत्र में उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि आज विश्व में ज्ञान विज्ञान के जितने भी स्रोत है, उन्हें हिन्दी भाषा में अनुवाद करने की महती आवश्यकता है। भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है, इसलिए हमें हिन्दी भाषा के साथ समस्त भारतीय भाषाओं के विकास के लिए कार्य करना चाहिए। हमारे पास विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या के साथ ही सबसे बड़ा बाजार भी है। इसलिए देश की बहुसंख्यक आबादी के द्वारा जानी और समझने वाली हिन्दी भाषा का सदैव महत्व रहा है और सदैव ही रहेगा क्योंकि इस देश में गुलामी और उधार की भाषा को बोलने और जानने वालों की संख्या सिर्फ दो प्रतिशत है।

हिन्दी दिवस समारोह के अवसर पर अतिथि व्याख्यान और संवाद कार्यक्रम के उपरांत बीए पंचम सेमेस्टर के विद्यार्थी सुयश प्रत्युष और बीसीए पंचम सेमेस्टर के दीपेन शाह ने गीत संगीत के साथ अपनी मनमोहक प्रस्तुति से सभी विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच संचालन बीजेएमसी तृतीय सेमेस्टर की विद्यार्थी गज़ाला परवीन और अब्दुल कैश रज़ा ने किया। कलिंगा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ.ए.राजशेखर ने आभार एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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इस समारोह में कला एवं मानविकी संकाय की अधिष्ठाता डॉ. शिल्पी भट्टाचार्य, हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. अनिता सामल, डॉ. योगेश वैष्णव, डॉ. बभूति कश्यप, डॉ. अभिषेक अग्रवाल, डॉ. पापरी मुखोपाध्याय, डॉ. ईशा चटर्जी, डॉ.रकीबुल हुसैन, जेसिका मिंज, तुहिना चौबे, मौमिता पॉल, मौली चक्रवर्ती, अर्चना नागवंशी, स्नेहाशीष सरकार और विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, कर्मचारी एवं प्राध्यापकगण उपस्थित थें।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।