टीआरपी डेस्क। Growth in Gold Loan : भारतीयों की सोने के प्रति आस्था और लगातार बढ़ती कीमतों ने गोल्ड लोन की मांग को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। RBI की रोक-टोक के बावजूद जुलाई 2025 तक देश में गोल्ड लोन की रफ्तार 122% तक पहुंच गई है। आंकड़े बताते हैं कि बैंकों और NBFC ने कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से जुलाई अंत तक ₹2,94,166 करोड़ गोल्ड लोन के रूप में वितरित किए हैं, जबकि जुलाई 2024 में यह आंकड़ा महज ₹1,32,535 करोड़ था।

गोल्ड लोन की मांग बढ़ने की वजह

विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी ने गोल्ड लोन को और आकर्षक बना दिया है। 26 सितंबर 2025 को सोना ₹1,17,700 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल 31 दिसंबर को इसकी कीमत ₹78,950 थी। यानी इस साल सोने की कीमत में अब तक ₹38,750 की वृद्धि देखी जा सकती है। इसका सीधा असर यह है कि कम मात्रा के सोने पर भी अधिक कर्ज मिल रहा है।

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RBI द्वारा पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड लोन पर ‘रिस्क वेट’ बढ़ाने के कारण बैंक अब ऐसे कर्ज देने में हिचकिचा रहे हैं। नतीजतन, छोटे कस्बों और गांवों में भी लोग गोल्ड लोन को बढ़-चढ़कर अपनाने लगे हैं। यहां तक कि माइक्रोफाइनेंस संस्थानों से कर्ज लेने वाला पिछड़ा वर्ग भी अब सोने के बदले कर्ज लेने की ओर बढ़ रहा है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने बढ़ाया दायरा

NBFC और स्मॉल फाइनेंस बैंक गोल्ड लोन को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए आसान बना रहे हैं। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों तक इसकी पहुंच तेजी से बढ़ रही है। फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट (FSR) के मुताबिक, 2024 में ₹7.1 लाख करोड़ का गोल्ड लोन मार्केट 2028 तक दोगुना होकर ₹14.19 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। हालांकि, बढ़ती मांग के बीच NPA (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां) बढ़ने के भी संकेत मिल रहे हैं।

Growth in Gold Loan : RBI इस जोखिम को देखते हुए 2025 में अप्रैल और जून महीने में गोल्ड लोन से जुड़े नियमों में बदलाव कर चुका है। बावजूद इसके, बाजार की रफ्तार फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रही है।

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