टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित इलाकों में चल रहे आत्मसमर्पण अभियान को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबलों और प्रशासनिक प्रयासों के परिणामस्वरूप नारायणपुर में 70 लाख रुपये के इनामी 7 महिला सहित कुल 16 नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वालों में पीएलजीए मिलिट्री कंपनी नंबर-1 के डिप्टी कमांडर, सदस्य, उत्तर ब्यूरो टेक्निकल टीम (डीवीसीएम), माड़ डिवीजन स्टाफ टीम के एसीएम, पार्टी सदस्य, कुतुल एलजीएस सदस्य, जनताना सरकार सदस्य और मिलिशिया सदस्य शामिल हैं।
आत्मसमर्पण के बाद सभी नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। साथ ही सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति के अंतर्गत उन्हें आवास, रोजगार और सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
वर्ष 2025 में अब तक कुल 192 माओवादी विभिन्न स्तरों पर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। प्रशासन का कहना है कि यह सफलता सुरक्षाबलों की सतत रणनीति, विकास कार्यों की पहुंच और जनविश्वास अभियान का परिणाम है।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने पूछताछ में बताया कि माओवादी संगठन के शीर्ष नेता बस्तर के आदिवासी युवाओं को समानता और न्याय के झूठे वादों से बहकाते हैं। वे लोगों को हथियार उठाने पर मजबूर करते हैं और वर्षों तक उन्हें गुलाम बनाकर रखते हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने कहा कि अब वे समाज और विकास की धारा में शामिल होकर शांति से जीवन जीना चाहते हैं।
नारायणपुर एसपी रोबिनसन गुड़िया ने बताया कि अबूझमाड़ दुर्गम जंगल और विकट भौगोलिक परिस्थतियों वाला एरिया है। इन इलाकों में फोर्स के कैंप खुलने से नक्सलियों का जनाधार कमजोर हुआ है। फोर्स के दबाव में नक्सली संगठन बैकफुट पर है।


