टीआरपी डेस्क। हर साल दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है, जिसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण द्वारा ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाने की लीला की याद में मनाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण, गाय और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है और विभिन्न अनुष्ठान किए जाते हैं।

इस वर्ष गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को मनाई जाएगी। प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे होगी और समापन 22 अक्टूबर शाम 8:16 बजे होगा। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:30 बजे से 8:47 बजे तक रहेगा।

गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बना

गोवर्धन पूजा के दिन घर के आंगन या मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनानी चाहिए और उसके बीच में भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। इस दिन 56 भोग या अन्नकूट तैयार कर उसे भगवान कृष्ण और गोवर्धन महाराज को अर्पित करना चाहिए। इसमें कढ़ी-चावल, बाजरा और माखन-मिश्री शामिल होना चाहिए। गाय की पूजा और उसे हरा चारा खिलाना भी आवश्यक है। गोवर्धन पर्वत की आकृति की सात बार परिक्रमा करनी चाहिए और संभव हो तो वास्तविक गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा भी करनी चाहिए। परिक्रमा के समय मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस दिन भगवान कृष्ण के मंदिर में दर्शन करना और सात्विक भोजन करना भी शुभ माना जाता है।

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अमावस्या में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाने चाहिए

गोवर्धन पूजा के दिन और उससे पहले आने वाली अमावस्या में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाने चाहिए। किसी भी पेड़-पौधे को काटना वर्जित है। इस दिन तामसिक भोजन न बनाना और मांस, मछली या अन्य तामसिक भोजन न खाना चाहिए। इन नियमों का पालन करने से पूजा का महत्व बढ़ता है और घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।