टीआरपी डेस्क। दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है, जिसे अन्नकूट भी कहा जाता है। यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक पूजा की जाती है और गौ सेवा का विशेष महत्व बताया गया है। ब्रज से प्रारंभ हुई यह परंपरा अब पूरे देश में मनाई जाती है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
गोवर्धन पूजा के शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष गोवर्धन पूजा के तीन शुभ मुहूर्त रहेंगे। इनमें सुबह का मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है।
- पहला मुहूर्त: सुबह 6:26 से 8:42 तक
- दूसरा मुहूर्त: दोपहर 3:29 से शाम 5:44 तक
- तीसरा मुहूर्त (गोधूली वेला): शाम 5:44 से 6:10 तक
गोवर्धन पूजा का महत्व
इस दिन वरुण देव, इंद्र देव और अग्नि देव की पूजा के साथ गौ पूजन का विशेष विधान है। गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य से पूजा की जाती है। परिवारजन एक ही रसोई में विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर उन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
पूजा विधि
सुबह स्नान से पहले शरीर पर तेल मालिश करें और मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। उसके पास ग्वाल-बाल और पेड़-पौधों के प्रतीक बनाएं। भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धापूर्वक पूजा करें। इसके बाद पकवान और पंचामृत का भोग लगाकर कथा सुनें और प्रसाद का वितरण करें।
गौ पूजा का विधान
गोवर्धन पूजा के बाद गौशाला जाकर गाय की सेवा करें। गाय को स्नान कराएं, श्रृंगार करें और भोजन या हरा चारा खिलाएं। श्रद्धा से उसके चरणों की मिट्टी लेकर माथे पर तिलक लगाएं।
शास्त्रों के अनुसार, गोवर्धन पूजा का प्रातःकालीन मुहूर्त सबसे शुभ माना गया है। इस समय पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


