टीआरपी डेस्क। हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को शुभ समय में करना सफलता का प्रतीक माना गया है। इसी शुभ-अशुभ समय को जानने के लिए पंचांग का सहारा लिया जाता है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण इन पांच अंगों से मिलकर बनता है। पंचांग के अनुसार, साल में कई बार ऐसा समय आता है जिसे ‘पंचक’ कहा जाता है और ज्योतिष शास्त्र में इसे अशुभ काल माना गया है।

अक्टूबर महीने के अंत में एक बार फिर पंचक लगने जा रहा है। इस वर्ष चोर पंचक 31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार से प्रारंभ होगा और 4 नवंबर 2025, मंगलवार को समाप्त होगा।

क्या होता है पंचक और क्यों माना जाता है अशुभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तो उस अवधि को पंचक कहा जाता है। चंद्रमा को इन पांच नक्षत्रों से गुजरने में लगभग पांच दिन लगते हैं, इसलिए इसे पंचक काल कहा जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए कार्यों में सफलता नहीं मिलती और कभी-कभी अशुभ परिणाम सामने आते हैं।

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पंचक के प्रकार और चोर पंचक का महत्व

पंचक पांच प्रकार के होते हैं—

  1. रोग पंचक (रविवार से शुरू)
  2. राज पंचक (सोमवार से शुरू)
  3. अग्नि पंचक (मंगलवार से शुरू)
  4. चोर पंचक (शुक्रवार से शुरू)
  5. मृत्यु पंचक (शनिवार से शुरू)

चोर पंचक शुक्रवार से शुरू होने वाला पंचक है, जिसे अन्य पंचकों की तुलना में अधिक अशुभ माना जाता है।

चोर पंचक के दौरान सावधानी क्यों जरूरी है

ज्योतिष के अनुसार, इस पंचक के दौरान चोरी, धन हानि या आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। इस समय में किसी भी नए निवेश, व्यापारिक समझौते या बड़ी खरीदारी से बचना चाहिए। यात्राओं के दौरान भी विशेष सतर्कता बरतना आवश्यक है।

चोर पंचक में भूलकर भी न करें ये कार्य

  • दक्षिण दिशा की यात्रा न करें, इसे यम दिशा माना गया है और इस दौरान यात्रा से हानि का योग बनता है।
  • नया व्यापार या कोई बड़ा सौदा न करें, धन हानि की संभावना रहती है।
  • लकड़ी, घास या अन्य ज्वलनशील वस्तुएं एकत्र करने से बचें, इससे दुर्घटना या आग लगने की आशंका होती है।
  • घर की छत बनवाना या चारपाई तैयार कराना अशुभ माना जाता है।
  • विवाह, गृह प्रवेश या किसी मांगलिक कार्य की शुरुआत न करें, क्योंकि यह समय शुभ नहीं माना जाता।
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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पंचक काल में संयम और सावधानी बरतना ही सबसे उत्तम उपाय है।