टीआरपी डेस्क। दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस तारा विस्ता गंजू अपने विदाई समारोह के दौरान भावुक हो गईं। सोमवार को आयोजित फेयरवेल स्पीच में उन्होंने अपने परिवार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनके पूरे करियर में मां और बेटी का सहयोग अमूल्य रहा है। इस दौरान जब उन्होंने बेटी को रोते देखा, तो वे खुद भी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और मुस्कुराते हुए कहा, “अगर तुम रोओगी, तो मैं भी रोऊंगी।”

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अगस्त 2024 में जस्टिस गंजू और जस्टिस अरुण मोंगा के स्थानांतरण की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने जस्टिस गंजू को कर्नाटक हाई कोर्ट और अरुण मोंगा को राजस्थान हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की अधिसूचना जारी की।

अपनी विदाई भाषण में जस्टिस गंजू ने बताया कि अचानक हुई परिस्थितियों के कारण उनका पूरा परिवार समारोह में उपस्थित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि कई बार देर रात तक काम करने या सप्ताहांत में दफ्तर में रहने को लेकर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि देर रात तक या वीकेंड में काम करने से कई बार गलतफहमी या आलोचना हुई, लेकिन मैंने कभी परिश्रम को दोष नहीं माना। न्याय की मांग हमेशा समय की सीमा में नहीं होती। हमारा पहला कर्तव्य राष्ट्र और उन लोगों के प्रति है जो हमसे न्याय की उम्मीद करते हैं।”

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उन्होंने अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट की दिवंगत जज रूथ बेडर गिन्सबर्ग का भी उल्लेख किया और कहा कि उनसे प्रेरणा मिली कि जिन चीजों की आप परवाह करते हैं, उनके लिए डटे रहें, लेकिन ऐसा इस तरह करें कि अन्य लोग भी आपके साथ जुड़ सकें।

जस्टिस गंजू ने आगे कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने कानून, निष्पक्षता और उत्तरदायित्व के बारे में उन्हें गहराई से सिखाया। उन्होंने कहा, “यह न्यायालय मेरा सबसे बड़ा शिक्षक रहा है। यहां बिताए गए वर्ष मेरी न्यायिक यात्रा के सबसे संतोषजनक वर्ष रहे हैं। मैं न्याय की सेवा उसी समर्पण के साथ जारी रखना चाहती हूं, जिसका यह न्यायालय प्रतीक है। आप सभी के स्नेह और शुभकामनाओं के लिए आभार।”