टीआरपी डेस्क। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ इंडिया गेट पर हुए प्रदर्शन में नारेबाजी अचानक बदलने के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है। शुरुआती नारे प्रदूषण और सरकार पर सवाल उठाने वाले थे, लेकिन थोड़ी देर बाद नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के पोस्टर लहराए गए और उसके समर्थन में नारे लगाए गए। पुलिस जांच में अब इस प्रदर्शन की कड़ियां जेएनयू के कुछ छात्र समूहों से जुड़ती दिखाई दे रही हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जेएनयू के वामपंथी छात्र इससे पहले भी 9 नवंबर को प्रदूषण विरोधी प्रदर्शन में शामिल हुए थे। उस समय छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा समेत कई छात्रों को हिरासत में लिया गया था। इस बार भी प्रदर्शन को वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से प्रायोजित बताया जा रहा है, जिसके दौरान पुलिस को झड़पों का सामना करना पड़ा।

इंडिया गेट पर हुई घटना को लेकर दिल्ली पुलिस ने दो थानों में केस दर्ज किए हैं और अब तक 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हाल ही में सुरक्षा बलों ने नक्सली कमांडर माडवी हिडमा को मुठभेड़ में ढेर किया था। वह कई बड़ी वारदातों और 76 सीआरपीएफ जवानों पर हुए घातक हमले का आरोपी था।

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भाजपा के आईटी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने एएनआई के वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि प्रदर्शन में दिख रहे कई चेहरे जेएनयू के वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े हैं। उनके मुताबिक दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण चिंता का विषय जरूर है, लेकिन इस साल की वायु गुणवत्ता पिछले एक दशक की तुलना में बेहतर रही है। उन्होंने इसका श्रेय केंद्र की ओर से पराली जलाने पर लगी रोक को दिया, साथ ही यह आरोप भी लगाया कि पंजाब अब भी प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।

मालवीय ने आप सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि शहर में सालों तक प्रदूषण पर बड़े प्रदर्शन नहीं हुए, लेकिन जैसे ही दिल्ली में भाजपा सरकार आई, अचानक विरोध बढ़ने लगे। उनके मुताबिक ये प्रदर्शन पर्यावरण से ज्यादा वैचारिक एजेंडे से प्रेरित हैं। मालवीय ने यह भी कहा कि 31 मार्च 2026 नक्सलवाद के अंत की तारीख साबित होगी।

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