दीपका (कोरबा)। एसईसीएल की दीपका कोयला खदान में कल दोपहर ब्लास्टिंग के दौरान एक कर्मी लखन पटेल, निवासी रैकी की दर्दनाक मौत ने पूरे कोयला क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। यह हादसा सुआ-भोड़ी फेस पर उस वक्त हुआ, जब अमानक तरीके से ब्लास्टिंग कराई जा रही थी। बताया जा रहा है कि सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर ब्लास्टिंग कराई जा रही थी, जिसकी चपेट में आकर कर्मी की मौके पर ही मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ब्लास्टिंग से पहले न तो पर्याप्त सेफ्टी ज़ोन बनाया गया और न ही कर्मियों को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर किसके आदेश पर और किन परिस्थितियों में यह खतरनाक ब्लास्टिंग कराई जा रही थी?

घटना के बाद लोगों में आक्रोश, धरना प्रदर्शन

इस घटना के बाद खदान क्षेत्र में आक्रोश का माहौल व्याप्त हो गया। कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने दीपका प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यहां पहले भी कई बार नियमों की अनदेखी कर उत्पादन के दबाव में जान जोखिम में डाली गई है।

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इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने एस ई सी एल दीपका में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रबंधन से वार्ता के बाद देर रात 11 बजे आंदोलन समाप्त हुआ। इस दौरान परिवार को 10 लाख रुपये व परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने पर सहमति बनी।

उत्पादन पहले, सुरक्षा बाद में..!

स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपका खदान में “उत्पादन पहले, सुरक्षा बाद में” की नीति खुलेआम चल रही है। अगर समय रहते अमानक ब्लास्टिंग पर रोक लगाई जाती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती, तो शायद आज एक और परिवार उजड़ने से बच जाता।

हैरानी की बात यह है कि हादसे के बाद भी प्रबंधन की ओर से कोई ठोस बयान या जिम्मेदारी तय करने की पहल नहीं की गई है। सवाल यह है कि क्या इस मौत को भी पूर्व में हुए अन्य हादसों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा या फिर इस बार किसी बड़े अधिकारी पर गाज गिरेगी?

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