टीआरपी। Makar Sankranti : जिस दिन सूर्य, धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, उस दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। अमूमन हर साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है। लेकिन, इस वर्ष 15 जनवरी को मनाना श्रेष्ठ माना जा रहा है, क्योंकि 14 जनवरी की रात्रि 9.30 के बाद सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश कर रहा है। संक्रांति का पुण्य काल 16 घंटे तक यानी 15 जनवरी को दोपहर तक शुभ है। सूर्योदय काल में पड़ने वाली तिथि का महत्व होने के कारण 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इसके बाद अब अगले 54 वर्ष तक अर्थात 2080 तक मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को ही मनाया जाएगा। 54 वर्ष बाद 16 जनवरी को मकर संक्रांति मनाएंगे। आइये, जानते हैं ऐसा किस कारण से हो रहा है।
72 वर्ष में एक दिन की वृद्धि
ज्योतिषाचार्य डा.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार प्रतिवर्ष सूर्य के राशि परिवर्तन में 20 मिनट की देरी होती है। इस तरह तीन वर्षों में एक घंटे का अंतर होता है। 72 वर्षों में 24 घंटे का अंतर होता है। संक्रांति का समय 72 वर्षों में एक दिन बढ़ जाता है।
ज्योतिष दृष्टिकोण से देखा जाए तो 1792 से 1863 तक मकर संक्रांति का पर्व 12 जनवरी को मनाया गया। 1863 में ही स्वामी विवेकानंद का जन्म मकर संक्रांति के दिन 12 जनवरी को हुआ था। इसके पश्चात 1864 से लेकर 1936 तक मकर संक्रांति 13 जनवरी को मनाई गई। 1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही है। अब, अगले 54 वर्षों तक यानी वर्ष 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। 2080 के बाद फिर मकर संक्रांति 16 जनवरी को मनाएंगे। 72 वर्षों में होने वाले 24 घंटों के अंतर के कारण एक-एक दिन मकर संक्रांति का पर्व आगे बढ़ता जाएगा।
मकर संक्राति पर राशि अनुसार करें दान
राशि – दान
मेष – लाल मिर्च, लाल वस्त्र, मसूर दाल
वृषभ – सफेद तिल के लड्डू चावल, चीनी
मिथुन – हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत मूंग
कर्क – सफेद वस्त्र, घी
सिंह – गुड़, चिक्की, शहद, मूंगफली
कन्या – खिचड़ी
तुला – सफेद वस्त्र, मखाना, चावल, चीनी
वृश्चिक – मूंगफली, गुड़, लाल रंगा का ऊनी स्वेटर
धनु – पीला वस्त्र, केला, बेसन, चना दाल
मकर – काला तिल, लड्डू, कंबल
कुंभ – ऊनी कपडा, सरसों तेल, जूता-चप्पल
मीन – पीली सरसों, चना दाल, फल


