नई दिल्ली। दिल्ली हिंसा और इसके लिए जिम्मेदार बताए जा रहे 4 भाजपा नेताओं के भड़काऊ बयानों के मामले में शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और अन्य पक्षकारों को 12 मार्च तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। तब तक सुनवाई आगे बढ़ाई गई है।

अदालत ने हिंसा के मामले में गिरफ्तार लोगों के नाम प्रकाशित करने की मांग पर दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस दिया है। इसके अलावा मृतकों के डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। अस्पताल प्रबंधन से कहा है कि मृतकों के पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी कराएं और 11 मार्च तक अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार न करें।

हाईकोर्ट ने पिछले दिनों मामले की सुनवाई अप्रैल तक टाल दी थी। पिछली सुनवाई में पुलिस को भड़काऊ बयानों पर कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के लिए एक महीने का वक्त दिया था। इसके बाद हिंसा के 10 पीड़ित भड़काऊ बयान देने वाले नेताओं पर एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे। तब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इन पर 6 मार्च को सुनवाई करने को कहा था।

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पहले भी भाजपा नेताओं पर कार्रवाई की मांग की गई

भड़काऊ बयानों के मामले में सबसे पहले सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा, अनुराग ठाकुर और अभय वर्मा के बयानों ने हिंसा फैलाने में अहम भूमिका निभाई।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 23 से 25 फरवरी के बीच हुई हिंसक घटनाओं में अब तक 53 लोगों की मौत हो चुकी है। 200 से ज्यादा जख्मी हैं। शुरुआती जांच में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साजिश का संदेह जताया है। पूरे घटनाक्रम की जांच एसआईटी के जिम्मे है। इसके अलावा पुलिस की लापरवाही की जांच और पीड़ितों को मुआवजा बांटने के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक पैनल बनाया है।

जज ने कोर्ट रूम में बयानों का वीडियो चलवाया था

हाईकोर्ट में मंदार की याचिका पर दो दिन सुनवाई हुई थी। पहले दिन जस्टिस एस मुरलीधर की अध्यक्षता वाली बेंच ने पुलिस और नेताओं को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने में देरी नहीं होनी चाहिए।

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जस्टिस मुरलीधर ने कोर्ट रूम में कपिल मिश्रा के बयान का वीडियो भी प्ले कराया था। तब उन्होंने कहा कि दिल्ली में हालात गंभीर हैं और हम 1984 के दंगे जैसी स्थिति नहीं होने देंगे। इसके बाद आधी रात को जस्टिस मुरलीधर का ट्रांसफर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में कर दिया गया। दूसरे दिन सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डीएन पटेल की बेंच ने सुनवाई अप्रैल तक टाल दी थी।

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