बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अवैध हिरासत और पुलिस की ज्यादती के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। पीठ ने पीड़ित होटल संचालक को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून व्यवस्था और जनता के भरोसे को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती हैं।

क्या है मामला..?

याचिकाकर्ता आकाश कुमार साहू दुर्ग जिले के भिलाई निवासी हैं। वे कोहका क्षेत्र में होटल का संचालन करते हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि स्थानीय पुलिस बिना किसी कानूनी आधार के बार-बार होटल के कामकाज में दखल दे रही है। इससे पहले भी कोर्ट ने उन्हें संरक्षण प्रदान किया था।

याचिका के अनुसार सितंबर 2025 में पुलिसकर्मी मेहमानों की जांच के बहाने होटल पहुंचे। आरोप है कि नियमों का पालन किए बिना, महिला पुलिसकर्मी की अनुपस्थिति में एक कमरे में प्रवेश किया गया और मेहमानों व स्टाफ को धमकाया गया। बाद में चोरी का झूठा आरोप लगाते हुए होटल स्टाफ के साथ मारपीट की गई।

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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें अपमानित किया, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और अवैध रूप से हिरासत में लेकर मारपीट की। इसके बाद उन्होंने इस पूरी घटना को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट ने की गंभीर टिप्पणी

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस की अवैध कार्रवाई, गैरकानूनी रिमांड और बर्बरता आपराधिक न्याय प्रणाली की नींव को हिला देती है। ऐसी घटनाएं कानून प्रवर्तन एजेंसियों की साख को कमजोर करती हैं और नागरिकों के संवैधानिक शासन में विश्वास को चोट पहुंचाती हैं।

दोषी अफसरों से वसूली कर सकती है सरकार

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पीड़ित को एक लाख रुपये मुआवजा ब्याज सहित दे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सरकार चाहे तो यह राशि दोषी पुलिस अधिकारियों से वसूल सकती है। अदालत ने पुलिसकर्मियों को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने कहा है।

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