टीआरपी डेस्क। महाराष्ट्र की राजनीति ने बुधवार, 28 जनवरी को एक और बड़ा झटका मिला। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा चार्टर्ड विमान बारामती में लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई। समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच अजित दादा के नाम से पहचाने जाने वाले अजित पवार महायुति सरकार में एक प्रभावशाली शक्ति केंद्र माने जाते थे। उनकी असमय मृत्यु ने न सिर्फ एनसीपी बल्कि पूरे राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
अजित पवार की मौत ने एक बार फिर उन घटनाओं की याद दिला दी है, जब अप्रत्याशित हादसों ने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी। बीते दो दशकों में कई बड़े नेताओं के अचानक निधन ने सत्ता समीकरणों को झकझोर दिया और राजनीतिक दलों को नए सिरे से खुद को संभालने पर मजबूर किया।
प्रमोद महाजन: भाजपा का रणनीतिक चेहरा
भाजपा के तेज-तर्रार नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रमोद महाजन अपने राजनीतिक करियर के शिखर पर थे, जब 3 मई 2006 को उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के बाद उन्हें पार्टी का सबसे मजबूत रणनीतिक दिमाग माना जाता था। उन्हें किंगमेकर कहा जाता था। राजनीति के साथ तकनीक और संचार को जोड़ने वाले महाजन को भाजपा का पहला आधुनिक स्पिन डॉक्टर भी माना गया। उनकी मौत ने पार्टी को भीतर तक झकझोर दिया।
गोपीनाथ मुंडे: भाजपा के चंद्रगुप्त
प्रमोद महाजन के करीबी और बहनोई गोपीनाथ मुंडे ने महाराष्ट्र की राजनीति में जातिगत सीमाओं को तोड़ते हुए एक नया आधार तैयार किया। 1995 में शिवसेना के साथ गठबंधन कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने में उनकी भूमिका निर्णायक रही। 3 जून 2014 को दिल्ली में एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया। उनके जाने के बाद भाजपा को राज्य में लंबे समय तक वैसा जनाधार वाला नेता नहीं मिल पाया।
विलासराव देशमुख: कांग्रेस को बड़ा झटका
दो बार मुख्यमंत्री रहे विलासराव देशमुख का 2012 में निधन कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान साबित हुआ। किसान परिवार से आने वाले देशमुख ने किसान ऋण माफी जैसे फैसलों से व्यापक समर्थन हासिल किया था। लीवर कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद 14 अगस्त 2012 को उनका निधन हो गया। उनके बाद कांग्रेस महाराष्ट्र में वैसा सर्वमान्य और संतुलन बनाने वाला नेता खड़ा नहीं कर सकी।
अजित पवार: सत्ता संतुलन के मास्टर
66 वर्षीय अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बेबाक फैसलों और प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाते थे। 1991 से लगातार सात बार बारामती से विधायक चुने गए। सहकारी क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ रही और जल संसाधन, ऊर्जा, ग्रामीण विकास जैसे अहम विभागों का जिम्मा संभाला। 2019 में 80 घंटे की सरकार और 2023 में एनसीपी के विभाजन के साथ सत्ता में उनकी एंट्री ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी। उनकी मौत से एनसीपी और महायुति दोनों के भीतर समीकरण बदलना तय माना जा रहा है।
इस हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, शरद पवार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई नेताओं ने गहरा दुख जताया है। महाराष्ट्र में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। अजित पवार का अंतिम संस्कार 29 जनवरी को बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।



