Leader of Opposition Akash Tiwari Raipur Press Conference.

टीआरपी।

राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राजाराम नाला और उससे लगी शासकीय डबरी पर हो रहे अवैध कब्जे को लेकर राजनीति गर्मा गई है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने आज एक पत्रकारवार्ता के माध्यम से जिला और निगम प्रशासन पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा की गई हालिया कार्रवाई महज एक दिखावा थी।

वीआईपी रोड और अमलीडीह क्षेत्र का यह नाला जल निकासी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि शासकीय भूमि और नाले पर कब्जा होता है, तो बारिश के दिनों में अमलीडीह और आसपास की बस्तियों में जलभराव का गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। इसके अलावा, बेशकीमती सरकारी जमीन की बंदरबांट जनता के संसाधनों का नुकसान है।

सीमांकन रिपोर्ट पर रहस्य क्यों?

नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि उन्होंने 30 दिसंबर 2025 को स्थल निरीक्षण कर निगम आयुक्त विश्वदीप से शिकायत की थी। आयुक्त ने एसडीएम को सीमांकन के निर्देश भी दिए थे, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी सीमांकन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। श्री तिवारी ने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन किस तथ्य को छुपाने की कोशिश कर रहा है?

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कार्रवाई के नाम पर ‘दीवार’ का खेल

कल समाचार पत्रों में अतिक्रमण हटाने की खबर आने के बाद आज सुबह नेता प्रतिपक्ष ने पुनः मौके का मुआयना किया। उन्होंने पाया कि कार्यवाही के नाम पर केवल एक छोटी सी दीवार गिराई गई है, जबकि नाले की दिशा को बदलने का प्रयास और अवैध कब्जा अब भी जस का तस है। उन्होंने इसे प्रशासन की ‘खानापूर्ति’ करार दिया।

प्रशासन से नेता प्रतिपक्ष के तीन तीखे सवाल:

  1. स्थल की सीमांकन रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
  2. शासकीय भूमि और नाले पर कब्जा करने वाले भू-माफियाओं पर FIR दर्ज क्यों नहीं हुई?
  3. क्या यह कब्जा शासन-प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है? आखिर किस रसूखदार को बचाने का प्रयास किया जा रहा है?
  • विवादित स्थल: राजाराम नाला, वीआईपी रोड (अमलीडीह क्षेत्र)।
  • शिकायत की तिथि: 30 दिसंबर 2025।
  • प्रमुख मांग: दोषियों पर एफआईआर और सीमांकन रिपोर्ट का प्रकाशन।
  • संबंधित अधिकारी: नगर निगम आयुक्त और रायपुर एसडीएम।
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नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही वास्तविक सीमांकन के आधार पर कब्जा नहीं हटाया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस मुद्दे को लेकर उग्र आंदोलन करेंगे। अब देखना होगा कि निगम प्रशासन इन सवालों का क्या जवाब देता है।