स्वामी सच्चिदानंद महाराज

टीआरपी। विंध्य अंचल की आध्यात्मिक चेतना के स्तंभ परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज (102) अब पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और सतना जिले के धारकुंडी आश्रम में उनकी पार्थिव देह के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

विंध्य क्षेत्र के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों में महाराज के लाखों अनुयायी हैं। उनके जाने से एक आध्यात्मिक युग का अंत हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल का इस शोक घड़ी में आश्रम पहुँचना इस महान व्यक्तित्व के सामाजिक और धार्मिक कद को दर्शाता है।

सीएम मोहन यादव देंगे श्रद्धांजलि, 500 जवान तैनात

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को धारकुंडी आश्रम पहुंचकर महाराज को नमन करेंगे। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने 500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की है। रीवा, सागर और जबलपुर से विशेष बल बुलाया गया है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए वाहनों की पार्किंग आश्रम से 5 किलोमीटर पहले ही सुनिश्चित की गई है।

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सोमवार को दी जाएगी समाधि

महाराज ने अपने जीवनकाल में ही अपनी समाधि का स्थान तय कर लिया था। सोमवार को धारकुंडी आश्रम के गर्भगृह में विधि-विधान के साथ उन्हें समाधि दी जाएगी। इस मौके पर चुनार के संत स्वामी अडगड़ानंद महाराज सहित देश के कई बड़े संत आश्रम पहुंच चुके हैं। महाराज ने 22 वर्ष की आयु में वैराग्य लिया था और ‘मानस बोध’ व ‘गीता बोध’ जैसे ग्रंथों के माध्यम से मानवता को सत्य का मार्ग दिखाया।

  • उम्र: 102 वर्ष की आयु में महाराज ने देह त्यागी।
  • सुरक्षा: 500 जवान और जिला पुलिस बल तैनात।
  • वीआईपी: सीएम डॉ. मोहन यादव, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, और सांसद गणेश सिंह ने जताया शोक।
  • समाधि: सोमवार को आश्रम के गर्भगृह में होगा विधि-विधान।

सोमवार को होने वाले समाधि कार्यक्रम में देश भर से साधु-संतों और वीआईपी के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन ने अगले 24 घंटों के लिए पूरे चित्रकूट और धारकुंडी क्षेत्र में कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए हैं।

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