टीआरपी। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि देश में अब मुगल शासक अकबर और बाबर का समय नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का शासन है, जहाँ देश शरीयत से नहीं बल्कि संविधान से चलेगा।
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष का यह बयान छत्तीसगढ़ की राजनीति में अल्पसंख्यक ध्रुवीकरण और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे मुद्दों पर बहस को तेज करेगा। राज्य सरकार की ‘सबका साथ-सबका विकास’ की नीति को मुस्लिम समाज के बीच ले जाने की यह एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
“वंदे मातरम् पर मुसलमानों को गुमराह किया गया”
डॉ. सलीम राज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दशकों तक तुष्टिकरण की राजनीति की और मुसलमानों के मन में अपनी ही मातृभूमि के प्रति भ्रम पैदा किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को मजहब के खिलाफ बताकर मुसलमानों को दूर रखा गया, जबकि इस्लाम सिखाता है कि जिस देश में रहें, उससे प्रेम करना और उसके संविधान का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने “मां तुझे सलाम” की भावना को इस्लाम की मूल भावना के अनुरूप बताया।
दंगा मुक्त भारत और सबका विकास
सलीम राज ने कांग्रेस पर ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में देश ने बार-बार दंगे झेले, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हुआ। इसके विपरीत, भाजपा शासनकाल को उन्होंने दंगा-मुक्त बताया। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वे आगे आएं और समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन करें ताकि समाज में समानता आ सके।
साय सरकार का उदाहरण: सामूहिक विवाह में दिखी एकजुटता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की तारीफ करते हुए उन्होंने बताया कि कन्या विवाह योजना के तहत 6,412 कन्याओं का सामूहिक विवाह कराया गया। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों ने अपने-अपने रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न किया, जो भाजपा की सर्वधर्म समभाव की नीति का सबसे बड़ा प्रमाण है।
- मुख्य वक्ता: डॉ. सलीम राज (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड)।
- बड़ा बयान: “देश संविधान से चलेगा, शरीयत से नहीं।”
- आरोप: कांग्रेस ने ‘वोट बैंक’ के लिए हिंदू-मुस्लिम के बीच दूरियां बढ़ाईं।
- उपलब्धि: कन्या विवाह योजना में 6,412 जोड़ों का सामूहिक विवाह।
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत गर्माना तय है। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर पलटवार की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में तुष्टिकरण और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर जुबानी जंग और तेज हो सकती है।


