Farmers protest for Pendrawan reservoir conservation Chhattisgarh.

रायपुर। पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति ने आज जलाशय के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें राज्य सरकार से खनन कंपनियों को जारी माइनिंग लीज तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। बैठक के बाद किसानों ने बंगोली मुख्य मार्ग पर चक्काजाम जैसी स्थिति निर्मित करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

बता दें कि पेंड्रावन जलाशय क्षेत्र के हजारों किसानों की सिंचाई और आजीविका का मुख्य आधार है। जलाशय क्षेत्र में खनन की अनुमति मिलने से जल स्तर गिरने और पर्यावरण विनाश का खतरा मंडरा रहा है। साथ ही, क्षेत्र में 35 नई मदिरा दुकानें खोलने के सरकारी निर्णय ने ग्रामीणों और महिलाओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

समिति ने निर्णय लिया है कि जलाशय को बचाने और स्थानीय मांगों को लेकर 22 फरवरी को एक विशाल पेंड्रावन संरक्षण सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। बैठक में समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक माइनिंग लीज रद्द नहीं होती, आंदोलन थमेगा नहीं। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा नई शराब दुकानें खोलने के फैसले को जनविरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की गई है।

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प्रदर्शन के दौरान समिति के अध्यक्ष अनिल नायक और सचिव घनश्याम वर्मा ने केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए। किसानों का आरोप है कि भारत-अमेरिका कृषि समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में लिया गया फैसला है, जो भारतीय किसानों को कर्ज के जाल में धकेल देगा।

नेताओं ने बीज विधेयक मसौदा 2025 और 4 श्रम संहिताओं का भी विरोध किया। उनका तर्क है कि 29 श्रम कानूनों को खत्म कर सरकार कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचा रही है और किसानों की बीज आत्मनिर्भरता को छीनने की साजिश रच रही है।

किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने 22 फरवरी के सम्मेलन से पहले माइनिंग लीज पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा और राजधानी घेराव की तैयारी की जाएगी।