Shiksha Samvad Chhattisgarh 2026 Controversy: रायपुर। राजधानी रायपुर में प्रस्तावित शिक्षा संवाद छत्तीसगढ़ 2026 कार्यक्रम को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। नोएडा स्थित इवेंट कंपनी इलेट्स टेक्नोमीडिया पर आरोप है कि उसने छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग के एक आधिकारिक पत्र का उपयोग कर कार्यक्रम को सरकारी आयोजन के रूप में प्रस्तुत किया और इसके आधार पर निजी विश्वविद्यालयों से स्पॉन्सरशिप के नाम पर धन एकत्र किया।

Shiksha Samvad Chhattisgarh 2026 Controversy: प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंपनी ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एस. भारती दासन के नाम से जारी एक पत्र का उपयोग किया, जिसमें कार्यक्रम को बिना किसी शुल्क के आयोजित किए जाने और विभाग के लोगो तथा लेटरहेड के उपयोग की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि इसी पत्र को आधार बनाकर प्रदेश के कई निजी विश्वविद्यालयों से आर्थिक सहयोग प्राप्त किया गया, जबकि कार्यक्रम का आयोजन एक निजी कंपनी द्वारा किया जा रहा है।

Shiksha Samvad Chhattisgarh 2026 Controversy:इस मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब कार्यक्रम का प्रचार छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी दिखाई दिया। इसके अलावा, इलेट्स टेक्नोमीडिया की वेबसाइट पर भी कार्यक्रम को विभाग के सहयोग से आयोजित बताया गया है और उच्च शिक्षा विभाग को सह आयोजक के रूप में दर्शाया गया है। इससे शैक्षणिक संस्थानों के बीच यह धारणा बनी कि यह एक अधिकृत सरकारी कार्यक्रम है।

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Shiksha Samvad Chhattisgarh 2026 Controversy:इस विषय पर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति महादेव कावरे ने बताया कि कार्यक्रम के आयोजक उनके पास पहुंचे थे और उन्होंने उच्च शिक्षा सचिव के पत्र को दिखाते हुए इसे सरकारी कार्यक्रम के रूप में प्रस्तुत किया था। इस कारण संस्थानों को कार्यक्रम की आधिकारिकता पर संदेह नहीं हुआ।

Shiksha Samvad Chhattisgarh 2026 Controversy: वहीं, इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने उच्च शिक्षा सचिव द्वारा जारी पत्र को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी ने इस पत्र के आधार पर निजी संस्थानों से धन प्राप्त किया है, तो संबंधित राशि वापस कराई जानी चाहिए।

Shiksha Samvad Chhattisgarh 2026 Controversy: कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि इसी कंपनी पर पहले मध्य प्रदेश में भी इसी प्रकार के आरोप लगे थे, जहां सरकारी पत्र के उपयोग के बाद मामला सामने आने पर कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था। यह मामला अब शैक्षणिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या विभाग की ओर से जारी पत्र का उपयोग निर्धारित सीमा से परे किया गया और क्या इससे निजी संस्थानों को भ्रमित किया गया।

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