टीआरपी। छत्तीसगढ़ के केशकाल वनमंडल और राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तेंदुए की खाल की तस्करी करने वाले 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई में विभाग ने खरीदार बनकर तस्करों को घेरा और उनके पास से 195 सेंटीमीटर लंबी तेंदुए की खाल और शिकार में प्रयुक्त भरमार बंदूक जब्त की है।
बस्तर संभाग के जंगलों में वन्यजीवों का अवैध शिकार पारिस्थितिक संतुलन के लिए बड़ा खतरा है। इस कार्रवाई से वन्यजीव तस्करों के अंतर-जिला नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, जिससे भविष्य में दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी और शिकारियों में भय व्याप्त होगा।
विभाग ने बिछाया जाल, खरीदार बनकर पकड़े तस्कर
यह पूरी कार्रवाई मुखबिर की सटीक सूचना पर आधारित थी। वन विभाग के एक कर्मचारी ने फर्जी खरीदार बनकर तस्करों से सौदा किया। जैसे ही आरोपी कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर से खाल लेकर रसगांव-बड़ेडोंगर मार्ग स्थित ग्राम बैलगांव पहुंचे, टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। मौके से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि मुख्य आरोपी को अगले दिन नारायणपुर के बोरावण्ड से पकड़ा गया।
7 महीने पहले हुआ था शिकार
पूछताछ में खुलासा हुआ कि तेंदुए का शिकार लगभग 7 महीने पहले अवैध भरमार बंदूक से किया गया था। तस्कर लंबे समय से खाल को बेचने के लिए ग्राहक की तलाश में थे। वनमंडलाधिकारी दिव्या गौतम के निर्देशन में आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
जब्ती: 195 सेमी लंबी और 45 सेमी चौड़ी तेंदुए की खाल।
आरोपी: कुल 9 तस्कर (4 अलग-अलग जिलों के निवासी)।
हथियार: शिकार में प्रयुक्त 1 अवैध भरमार बंदूक बरामद।
वन विभाग अब इस गिरोह के अन्य संभावित संपर्कों की जांच कर रहा है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर राज्य के अन्य हिस्सों में भी छापेमारी की जा सकती है ताकि वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।



