Iran-Israel War: पिछले 28 फरवरी से ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध ने अब पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार 25 मार्च 2026 की शाम 5 बजे एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई है। दरअसल, इस बैठक में पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालातों और भारत की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी। सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ही सीडीएस और तीनों सेना प्रमुखों के साथ हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग कर ली है।

विपक्ष का हमला- इतनी देर क्यों लगाई?

गौरतलब है कि इस बैठक से पहले ही सियासी पारा चढ़ गया है। सोमवार को लोकसभा में पीएम मोदी के बयान के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई दिग्गज नेताओं ने सरकार को घेरा है। राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी ने बहुत कम समय में इस गंभीर मुद्दे पर बात की, जबकि सदन में इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए थी। शिवसेना (UBT) सांसद ने सवाल उठाया कि ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन पर शोक जताने में भारत को 3 दिन क्यों लग गए? उन्होंने पीएम के रवैये को पक्षपातपूर्ण बताया।

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PM मोदी ने क्या कहा? जो बन गया चर्चा का विषय

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में ईरान-इजरायल युद्ध की तुलना कोरोना संकट से कर दी है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का असर लंबे समय तक रहने वाला है और देशवासियों को उसी दृढ़ता से इसका सामना करना होगा जैसे हमने महामारी का किया था। सूत्रों के अनुसार, पीएम ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर हो रहे हमलों को अस्वीकार्य बताया और कहा कि समाधान सिर्फ बातचीत से ही संभव है।

रक्षा मंत्री की हाई-लेवल मीटिंग: सेना प्रमुखों के साथ मंथन

दरअसल, सर्वदलीय बैठक से पहले सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बड़ी समीक्षा बैठक की। इस बैठक में CDS जनरल अनिल चौहान तीनों सेना प्रमुख (थल, नभ और जल सेना), DRDO अध्यक्ष समीर कामत शामिल रहे। इस बैठक में भारत की समुद्री सीमाओं और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रोडमैप तैयार किया गया है।

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