टीआरपी डेस्क। आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। राज्यसभा सांसद और कभी पार्टी के सबसे भरोसेमंद चेहरे रहे राघव चड्ढा ने डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने और संसद में बोलने से रोके जाने पर पहली बार चुप्पी तोड़ी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए राघव ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और कई तीखे सवाल दागे हैं।
क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध है?
दरअसल, राघव चड्ढा ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से लिखित रूप में कहा है कि उन्हें संसद में बोलने की अनुमति न दी जाए। राघव ने वीडियो में पूछा, “क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? मैंने हमेशा मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ, टोल प्लाजा की लूट और टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी जैसे मुद्दे उठाए। अब पार्टी मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहती है?”
इन मुद्दों को लेकर चर्चा में रहे राघव
गौरतलब है कि राघव चड्ढा ने हाल के दिनों में कई ऐसे विषय उठाए थे जो सीधे आम आदमी की जेब से जुड़े थे:
- महंगाई: एयरपोर्ट पर महंगे खाने और जोमैटो-ब्लिंकिट डिलीवरी राइडर्स की समस्याएं।
- डिजिटल लूट: 28 दिन के रिचार्ज (12 महीने में 13 बार रिचार्ज) और डेटा रोलओवर का मुद्दा।
- टैक्स: मिडिल क्लास पर बढ़ता टैक्स का बोझ और कंटेंट क्रिएटर्स पर स्ट्राइक का मामला।
राघव का दावा है कि इन मुद्दों से जनता को फायदा हुआ, लेकिन शायद पार्टी के कुछ ‘खास’ लोगों को यह रास नहीं आया।
‘मैं वह नदी हूं जो बाढ़ बन जाती है’
बता दें कि वीडियो के अंत में राघव चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व को कड़ा संदेश देते हुए चेतावनी भरे लहजे में शायरी का सहारा लिया। उन्होंने कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझिए। मैं वह दरिया हूं, जो समय आने पर बाढ़ बन जाती है।” उनके इस बयान के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या राघव चड्ढा अब पार्टी से अलग कोई नई राह तलाश रहे हैं?


