0 प्रदेश भर में 38,438 आवेदन हो चुके हैं जमा
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच प्रतिपूर्ति राशि को लेकर तनातनी अब भी जारी है। इस राशि को बढ़ाने की मांग को लेकर एसोसिएशन ने आरपार की लड़ाई शुरू कर दी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा है कि इस वर्ष आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को एडमिशन नहीं दिया जायेगा। जब तक राज्य सरकार छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करती है, हमारा यह निर्णय और सरकार के खिलाफ अहसयोग आंदोलन जारी रहेगा।
निर्धारित सीटों से काफी ज्यादा आवेदन हुए हैं जमा
छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार RTE ‘ के तहत निजी स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया के तहत इस बार राज्य के कुल 6861 स्कूलों की 21,698 सीटों के लिए कुल 38,438 आवेदन जमा हुए हैं। इधर प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा असहयोग आंदोलन के तहत RTE के बच्चों को प्रवेश देने से इंकार करने के बाद असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है।
इस संबंध में रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि हम शालीनता से अपने आंदोलन की ओर अग्रसर है, लेकिन लगातार हो रही अनदेखी को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस वर्ष शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्रवेश न देने का निर्णय लिया है।
इस वर्ष प्रदेश के 6000 से ऊपर निजी स्कूल जिनमें शिक्षा के अधिकार कानून के तहत इसी माह से प्रवेश प्रस्तावित है, वहां हम लॉटरी के माध्यम से आने वाले विद्यार्थियों की एडमिशन की प्रक्रिया में सहयोग नहीं करेंगे। ऑनलाइन माध्यम से प्रवेश हेतु चयनित विद्यार्थियों को स्कूलों में प्रवेश देना होता है। स्कूल शिक्षा विभाग की लापरवाही एवं संवेदनहीन रवैये के कारण इस वर्ष प्रदेश के वंचित वर्ग के विद्यार्थियों का शिक्षा के अधिकार कानून (आर.टी.ई.) प्रवेश नहीं हो पायेगा। गरीब ,वंचित विद्यार्थियों की शिक्षा में गुणवत्ता की अनदेखी अब निजी स्कूल बर्दाश्त नहीं करेगा हमें मजबूरन ना चाहते हुए भी यह कठोर निर्णय लेना पड़ रहा है।
प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की कर रहे हैं मांग
शिक्षा के अधिकार कानून RTE में पहली बार प्रदेश के निजी स्कूलों में प्रवेश सन 2011 में हुआ था। 2011 से ही कक्षा पहली से पांचवी तक की प्रतिपूर्ति राशि 7000/-, छठवीं से आठवीं तक 11400/- प्रति विद्यार्थी ,प्रति वर्ष तय की गई थी। राज्य सरकार ने कक्षा नवमीं से बारहवीं को वर्ष 2018 में शिक्षक के अधिकार कानून के दायरे में लाया एवं राशि 15000/- प्रति विद्यार्थी, प्रति वर्ष तय की है।
एसोसिएशन का कहना है, राज्य सरकार ने सन 2011 से आज तक प्रतिपूर्ति राशि नहीं बधाई है। जबकि इसकी मांग संगठन 2016 से लगातार कर रहा है। इसके बावजूद अनदेखी के कारण संगठन ने जुलाई 2025 में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई थी। याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन को राज्य सरकार के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने और अभ्यावेदन पर छह महीने के बाद कार्रवाई का निर्देश राज्य सरकार को दिया था।
हाई कोर्ट के आदेश की भी हो रही है अनदेखी
एसोसिएशन का कहना है, हाई कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद हम लगातार बीते 6 महीने से स्कूल शिक्षा विभाग से उच्च न्यायालय के आदेश पर संवेदनशीलता से विचार करने को निवेदन कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इतने महत्वपूर्ण विषय पर अनदेखी किए जाने के बाद 1 मार्च को प्रदेश कार्यकारिणी ने असहयोग आंदोलन का ऐलान किया था।
अध्यक्ष राजीव गुप्ता का कहना है, असहयोग आंदोलन के चलते हम स्कूल शिक्षा विभाग के किसी पत्र, नोटिस का जवाब नहीं दे रहे हैं। प्रदेश के समस्त जिलों में मार्च में ही अपने-अपने जिलों में असहयोग आंदोलन का ऐलान कर दिया था। स्कूल शिक्षा विभाग को लगातार हम इस मांग के पीछे जायज कारणों से अवगत कराते आ रहे हैं। राशि इतनी कम है कि सभी विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
अन्य राज्यों की प्रतिपूर्ति राशि छत्तीसगढ़ से ज्यादा
एसोसिएशन ने मीडिया को बताया कि RTE के तहत अन्य राज्यों में दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि काफी ज्यादा है। अन्य प्रदेशों में प्रतिपूर्ति राशि छत्तीसगढ़ से बहुत ज्यादा है एवं यह राज्य समय-समय पर इसका पुनः निर्धारण भी कर रहे हैं। असम-16396/-, चंडीगढ़-28176/-, गुजरात – 13000/- हिमाचल प्रदेश 34744/-, कर्नाटक -8000/- एवं 16000/-, महाराष्ट्र -17670/- उड़ीसा -21247/-, राजस्थान-10688/-, तमिलनाडु -11700/-, उत्तराखंड-16596/-, छत्तीसगढ़ से कम प्रतिपूर्ति राशि सिर्फ तीन राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की है।



