टीआरपी डेस्क। बदलती जीवनशैली के कारण अब बच्चों में भी गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ गया है, जिसे समय रहते केवल मेडिकल टेस्ट के जरिए ही पहचाना जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, बच्चों की उम्र और उनकी शारीरिक जरूरत के हिसाब से समय-समय पर ब्लड टेस्ट कराना उनकी बेहतर ग्रोथ के लिए अनिवार्य है।
बीमारियों की पहचान के लिए जरूरी टेस्ट
बच्चों के शरीर में पनप रही किसी भी समस्या का सटीक पता लगाने के लिए एक्सपर्ट्स कुछ बेसिक टेस्ट की सलाह देते हैं। सबसे प्राथमिक जांच CBC (Complete Blood Count) है, जिससे एनीमिया (खून की कमी) और इन्फेक्शन का पता चलता है। इसके अलावा, आजकल बच्चों में विटामिन D और B12 की कमी बेहद आम हो गई है, जो उनकी हड्डियों और दिमागी विकास को प्रभावित करती है।
यदि बच्चे की ग्रोथ धीमी है या वजन अचानक बढ़/घट रहा है, तो थायरॉयड फंक्शन टेस्ट और कैल्शियम टेस्ट भी कराना जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भले ही बच्चे में कोई बाहरी लक्षण न दिखे, फिर भी साल-दो साल में एक बार रूटीन चेकअप कराना एक समझदारी भरा कदम है।
CBC Test: खून की कमी और रोग प्रतिरोधक क्षमता की जांच के लिए सबसे बेसिक टेस्ट।
Vitamins: विटामिन D और B12 की कमी बच्चों में थकान और चिड़चिड़ेपन का मुख्य कारण है।
Growth Check: वजन और लंबाई के असामान्य होने पर थायरॉयड की जांच अनिवार्य है।
Frequency: स्वस्थ दिखने वाले बच्चों का भी हर 2 साल में एक बार बॉडी चेकअप होना चाहिए।
टेस्ट से पहले ध्यान रखने वाली बातें
जब भी बच्चे का ब्लड टेस्ट कराएं, सुनिश्चित करें कि लैब NABL से मान्यता प्राप्त हो। कुछ टेस्ट (जैसे शुगर या लिपिड) के लिए खाली पेट रहना जरूरी होता है, इसलिए टेस्ट से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। बच्चे को मानसिक रूप से तैयार करें ताकि वह सुई से डरे नहीं।


