रायपुर में कचरा प्रबंधन के लिए "स्वच्छता के चार धुरंधर" अभियान शुरू। 4 डिब्बों में अलग करना होगा कचरा।

टीआरपी। राजधानी रायपुर को देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने के लिए नगर पालिक निगम ने “स्वच्छता के चार धुरंधर” अभियान की शुरुआत की है। महापौर मीनल चौबे और स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष गायत्री सुनील चंद्राकर ने नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत इस पहल का शुभारंभ किया, जिससे कचरा पृथक्करण को अब चार अलग-अलग श्रेणियों में लागू किया जाएगा।

यह पहल रायपुर के नागरिकों के लिए कचरा फेंकने के तरीके को पूरी तरह बदल देगी। अब तक केवल गीला और सूखा कचरा अलग किया जाता था, लेकिन अब सेनेटरी और खतरनाक कचरे को अलग करने से सफाई कर्मियों की सुरक्षा बढ़ेगी और कचरे का वैज्ञानिक ढंग से निष्पादन (Disposal) आसान होगा।

चार रंगों के डिब्बे: क्या और कैसे करें पृथक्करण?


अभियान के तहत अब शहरवासियों को अपने घरों में कचरे को चार रंगों के डस्टबिन में बांटना होगा। महापौर ने स्पष्ट किया कि गीला और सूखा कचरा नियमित होता है, लेकिन सेनेटरी और खतरनाक कचरे को इसमें मिक्स करना पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है।

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ये हैं ‘स्वच्छता के चार धुरंधर’:

हरा डिब्बा (गीला कचरा): सब्जियों के छिलके और बचा हुआ भोजन।

नीला डिब्बा (सूखा कचरा): प्लास्टिक, कागज और धातु के सामान।

लाल डिब्बा (सैनिटरी कचरा): इस्तेमाल किए गए डायपर और सेनेटरी पैड।

काला डिब्बा (विशेष देखभाल कचरा): घरेलू खतरनाक अपशिष्ट जैसे पेंट, केमिकल के डिब्बे, कीटनाशक और एक्सपायर्ड दवाइयां।

जागरूकता के लिए विशेष अभियान
महापौर मीनल चौबे ने कहा कि शहर को स्वच्छ बनाने के लिए नागरिकों को इसे अपनी आदत बनाना होगा। इसके लिए स्कूलों, कॉलोनियों और बाजारों में विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। साथ ही, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को भी इन चार श्रेणियों के अनुसार अपडेट किया जा रहा है।

नया नियम: यह पहल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के अनुरूप है।

हेल्पलाइन: कचरा वाहन समय पर न आने पर नागरिक 1100 पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

नारा: “चार डिब्बे अपनाएं – रायपुर को स्वच्छ बनाएं”।

नगर निगम जल्द ही कचरा कलेक्शन वाहनों में भी इन चार श्रेणियों के लिए अलग-अलग सेक्शन सुनिश्चित करेगा। जो नागरिक कचरा अलग नहीं करेंगे, उन्हें आने वाले समय में समझाइश के साथ-साथ जुर्माने का सामना भी करना पड़ सकता है।

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