टीआरपी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने रविवार को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस और ‘इण्डी गठबंधन’ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने नारी शक्ति वंदन (संशोधन) अधिनियम को लोकसभा में पारित नहीं होने देने को देश की 70 करोड़ महिलाओं के साथ विश्वासघात और ‘महापाप’ करार दिया है।
छत्तीसगढ़ में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी हमेशा से उच्च रही है, जहाँ पंचायतों में 50% से अधिक नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि केंद्र की तर्ज पर राज्य में भी महिलाओं को सशक्त बनाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन बिल रुकने से आगामी परिसीमन और सीटों की संख्या (संभावित 135 विधानसभा और 18 लोकसभा) के विस्तार पर भी असर पड़ सकता है।
“कांग्रेस का चरित्र हमेशा महिला विरोधी रहा” – विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक कदम उठाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और सपा के अड़ियल रवैये के कारण यह बिल रुक गया। साय ने जोर देकर कहा कि भाजपा हर बाधा दूर कर मातृशक्ति को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाकर रहेगी।
17 अप्रैल: भारतीय लोकतंत्र का ‘काला अध्याय’
भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने 17 अप्रैल की तारीख को भारतीय राजनीति का काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि जब बिल गिरा, तो विपक्षी दलों ने संसद में मेज थपथपाकर खुशियाँ मनाईं, जबकि देश की महिलाओं की आँखों में आँसू थे। सिंह ने शाहबानो प्रकरण और ट्रिपल तलाक का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया है।
आरक्षण का लक्ष्य: लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला नेतृत्व।
छत्तीसगढ़ की स्थिति: पंचायतों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व वर्तमान में 57 प्रतिशत।
भविष्य का खाका: परिसीमन के बाद छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटें 90 से 135 और लोकसभा सीटें 11 से 18 होने का अनुमान।
उपस्थिति: प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद रूपकुमारी चौधरी और कमलेश जांगड़े सहित वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
भाजपा इस मुद्दे को लेकर बूथ और मंडल स्तर तक जाएगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि कांग्रेस के ‘महिला विरोधी’ चरित्र का पर्दाफाश करने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जाएगा। भाजपा का संकल्प है कि 2029 के चुनाव से पहले इस अधिनियम की बाधाओं को दूर कर इसे प्रभावी ढंग से लागू कराया जाए।



