प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक बड़ी कानूनी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के आदेश देने की मांग वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की सिंगल बेंच ने सिमरन गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने संभल की निचली अदालत के उस निर्णय को बरकरार रखा है, जिसने पहले ही इस मामले में एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल 2026 को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे आज सार्वजनिक किया गया।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद राहुल गांधी द्वारा जनवरी 2025 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यालय के उद्घाटन के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा है। राहुल गांधी ने कहा था, हम भाजपा, आरएसएस और भारत सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने इसे देशद्रोह करार दिया था। उनका तर्क था कि भारत सरकार के खिलाफ लड़ाई की बात करना देश को अस्थिर करने की साजिश है और इससे जनभावनाएं आहत हुई हैं।
अदालत के फैसले के मायने
कोर्ट के फैसले से यह साफ होता है कि किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का विरोध करना देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आता। यह फैसला लोकतांत्रिक ढांचे में राजनीतिक आलोचना और अभिव्यक्ति की आजादी को मजबूती प्रदान करता है। हाईकोर्ट ने माना कि संभल कोर्ट का शुरुआती फैसला कानूनी रूप से सही था और उसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। राहुल गांधी के लिए यह एक बड़ी जीत है, क्योंकि 2025 से चल रहा यह कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। विपक्ष के लिए यह राहत की बात है कि उनके राजनीतिक बयानों को न्यायिक स्तर पर सुरक्षा मिली है।



