टीआरपी। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है, जहां अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK को कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए सशर्त समर्थन दे दिया है। इस कदम से द्रमुक (DMK) बुरी तरह भड़क गई है और उसने अपने सबसे पुराने सहयोगी पर जनादेश के अपमान का आरोप लगाया है।
दक्षिण भारत की इस राजनीतिक उठापटक का असर राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी एकता पर पड़ना तय है। छत्तीसगढ़ में सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि क्षेत्रीय समीकरणों के लिए राष्ट्रीय पार्टियां किस तरह पुराने गठबंधन तोड़ सकती हैं।
द्रमुक के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने बुधवार को कांग्रेस के इस फैसले को ‘धोखा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जीत के प्रमाण पत्र की स्याही सूखने से पहले ही कांग्रेस ने पाला बदल लिया, जो कि तमिलनाडु की जनता की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। द्रमुक ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने ही सबसे पहले राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बदले में उन्हें यह मिला।
कांग्रेस की शर्तें और समीकरण
कांग्रेस ने TVK को समर्थन देने के लिए कड़ी शर्तें रखी हैं। इसमें सांप्रदायिक ताकतों से दूरी बनाना, संवैधानिक मूल्यों का पालन और ‘थंथाई पेरियार’ के सामाजिक न्याय के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता शामिल है। गौरतलब है कि 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। TVK की 108 और कांग्रेस की 5 सीटें मिलकर 113 तक पहुँचती हैं, जो अभी भी बहुमत से 5 कम हैं।
TVK की सीटें: 108 (सबसे बड़ी पार्टी)
बहुमत का आंकड़ा: 118 सीटें
कांग्रेस का योगदान: 05 विधायक (सशर्त समर्थन)
शपथ ग्रहण की संभावित तारीख: 7 मई 2026
बहुमत साबित करने के लिए विजय को अब अन्य छोटे दलों या अन्नाद्रमुक (AIADMK) के समर्थन की जरूरत होगी। आज TVK प्रमुख राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं।


