हाईकोर्ट भवन के सामने न्याय का हथौड़ा और सरकारी भर्ती परीक्षा रद्द होने की खबर का दृश्यांकन
हाईकोर्ट ने सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती परीक्षा 2025 के परिणाम निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे काले दिन, यानी ताड़मेटला नक्सली हमले को लेकर हाईकोर्ट से एक ऐसी खबर आई है जिसने सुरक्षा महकमे और सरकार को सोच में डाल दिया है। साल 2010 में हुए उस भीषण नरसंहार में सीआरपीएफ (CRPF) के 76 जवान शहीद हुए थे, लेकिन अब इस मामले के सभी आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी: अभियोजन पक्ष पूरी तरह फेल

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने इस फैसले को सुनाते हुए शासन और जांच एजेंसियों को जमकर आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने बेहद भावुक और तल्ख अंदाज में कहा कि हमें यह देखकर गहरा दुख हो रहा है कि 76 जवानों की शहादत के बाद भी एजेंसियां असली गुनहगारों को सजा दिलाने में नाकाम रहीं। कोर्ट ने साफ कहा कि फाइल में ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं था जिसके आधार पर सजा दी जा सके, इसीलिए निचली अदालत को उन्हें बरी करने के लिए विवश होना पड़ा।

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जांच में रह गईं ये 5 बड़ी खामियां, जिसका फायदा आरोपियों को मिला

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने जांच की उन परतों को उधेड़ा जो अब तक दबी हुई थीं। किसी भी चश्मदीद गवाह ने आरोपियों की पहचान नहीं की और न ही कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) कराई गई। मामले में कोई फोरेंसिक रिपोर्ट पेश नहीं की गई, जो वैज्ञानिक तौर पर अपराध साबित कर सके। पुलिस जिन हथियारों और विस्फोटक की बात कर रही थी, वे सीधे तौर पर आरोपियों के पास से बरामद नहीं हुए थे। आर्म्स एक्ट के तहत जो कानूनी कागजी कार्रवाई (अभियोजन स्वीकृति) होनी चाहिए थी, उसका रिकॉर्ड तक नहीं था। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी से कड़ी नहीं जुड़ पाई।

मास्टरमाइंड हिडमा और वो 6 अप्रैल की सुबह

6 अप्रैल 2010 की उस सुबह को बस्तर कभी नहीं भूल सकता। दंतेवाड़ा के ताड़मेटला जंगलों में नक्सलियों ने घात लगाकर सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन पर हमला किया था। इस हमले का मास्टरमाइंड कुख्यात नक्सली हिडमा था, जिसका नवंबर 2025 में सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर कर दिया था। सरकार ने दलील दी थी कि आरोपी बरसे लखमा का कबूलनामा और बरामद पाइप बम सजा के लिए काफी हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ बातों से सजा नहीं होती, कानून को सबूत चाहिए।

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सरकार को नसीहत: सुधारें जांच का तरीका

डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसे गंभीर मामलों में जांच के उच्च मानक अपनाने होंगे। कोर्ट ने कहा कि अगर इसी तरह की प्रक्रियात्मक चूक होती रही, तो न्याय प्रणाली से लोगों का भरोसा उठ जाएगा।