बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में प्रदेश की प्रमुख नदियों, विशेषकर अरपा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और उद्गम स्थलों की सुरक्षा को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की। मुख्य सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेषज्ञों को शामिल करते हुए नई राज्य स्तरीय समिति का पुनर्गठन किया गया है।
सरकार ने अदालत को बताया कि यह समिति मई 2026 के अंतिम सप्ताह में अपनी पहली बैठक करेगी, जिसमें जिला स्तरीय समितियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा और निगरानी की जाएगी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई।
मूल रूप से अधिवक्ता अरविंद शुक्ला और रामनिवास तिवारी ने अरपा नदी की खराब स्थिति को लेकर जनहित याचिका दायर की है। बाद में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य की अन्य नदियों की स्थिति को भी सुनवाई के दायरे में शामिल कर लिया। इसके बाद विभिन्न जनहित याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई की जा रही है।
पिछली सुनवाई में सरकार ने अदालत को जानकारी दी थी कि जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समितियां गठित की गई हैं। ये समितियां अरपा, महानदी, शिवनाथ नदी, हसदेव नदी, तांदुला नदी, पैरी नदी, मांड नदी, केलो नदी, सोन नदी, तिपान नदी और लीलागर नदी जैसी प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों की पहचान, सीमांकन और संरक्षण का काम कर रही हैं।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं की इस मांग को स्वीकारा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सरकार द्वारा नई समिति गठित किए जाने के बाद वे भी स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों के साथ संबंधित स्थलों का स्वतंत्र निरीक्षण करना चाहते हैं। अदालत ने इस मांग को स्वीकार कर लिया।
खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता स्थल निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट और तथ्य अदालत के समक्ष रख सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई अब ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद 11 जुलाई को होगी।
नई समिति में इन्हें किया गया है शामिल
राज्य सरकार द्वारा गठित नई राज्य स्तरीय समिति का नेतृत्व छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव करेंगे। समिति में वित्त विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग तथा खनिज संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा विशेषज्ञ सदस्यों के रूप में एम.के. वर्मा, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के प्रोफेसर और पर्यावरणविद् समीर बाजपेयी, जल विज्ञानी इश्तियाक अहमद तथा भू-वैज्ञानिक हिमांशु गोविल को शामिल किया गया है।
सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण, पुनर्जीवन और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए प्राथमिकता के आधार पर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।



