टीआरपी डेस्क। भारतीय जनता पार्टी में 25 मई के बाद बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दिल्ली से लेकर रायपुर तक लगातार बैठकों और अंदरूनी मंथन ने यह संकेत दे दिए हैं कि पार्टी अब अगले चुनावी चरण की तैयारी में जुट चुकी है। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी चुनाव के बाद भाजपा का पूरा फोकस अब 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव पर है। यही वजह है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर नए संतुलन की तैयारी शुरू हो गई है।

केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा क्यों?

संविधान के अनुसार, केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं। फिलहाल करीब 72 मंत्री ही हैं। यानी अभी 9 पद खाली हैं। इसी वजह से लंबे समय से केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा चल रही है। भाजपा शासित राज्यों से नए चेहरों को मौका देने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि छत्तीसगढ़ से भी किसी सांसद को केंद्रीय मंत्री बनाया जा सकता है।

भाजपा सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि संगठन को भी नए तरीके से तैयार करने में लगी है। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री जैसे पदों पर नई नियुक्तियां कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ से 5 से 6 नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिल सकती है। इनमें कुछ नेताओं को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।

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बंद कमरे की बैठकों में क्या हुआ?

मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश और प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं के बीच कई दौर की बंद कमरे में चर्चा हो चुकी है। इन बैठकों में सिर्फ संगठन समीक्षा नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक रणनीति, नेतृत्व संतुलन और सरकार की परफॉर्मेंस पर भी चर्चा हुई है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ में सरकार और संगठन दोनों को लेकर फीडबैक और सर्वे कराया है। उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जा रही है।

कोर कमेटी में बदलाव की क्यों बढ़ी चर्चा?

छत्तीसगढ़ भाजपा की कोर कमेटी में हाल ही में बड़ा बदलाव किया गया। मंत्री ओपी चौधरी, डिप्टी सीएम विजय शर्मा और पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल को नई टीम में जगह मिली। वहीं कई पुराने और बड़े चेहरे बैठक में नजर नहीं आए। इनमें डॉ. रमन सिंह, रामविचार नेताम, विक्रम उसेंडी, रेणुका सिंह और बृजमोहन अग्रवाल जैसे नेता शामिल रहे।

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इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा अब संगठन में नई पीढ़ी और नए राजनीतिक समीकरणों को आगे बढ़ाना चाहती है। प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने भी कोर कमेटी के पुनर्गठन की जानकारी दी।

विजय शर्मा का नाम सबसे आगे क्यों?

संगठन में सबसे ज्यादा चर्चा डिप्टी सीएम विजय शर्मा को लेकर है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। भाजपा फिलहाल ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाना चाहती है जो एक्टिव राजनीति, चुनावी प्रबंधन और संगठन विस्तार में प्रभावी माने जाते हैं।
वहीं, उपमुख्यमंत्री अरुण साव का नाम भी चर्चा में है, लेकिन विजय शर्मा को लेकर राजनीतिक संकेत ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहे हैं।

महिला चेहरे पर भाजपा का नया फोकस

अगर सरकार या संगठन में बड़ा बदलाव होता है, तो भाजपा महिला नेतृत्व को भी आगे ला सकती है। राजनीतिक चर्चाओं में लता उसेंडी और रेणुका सिंह जैसे नाम सामने आ रहे हैं। इसके पीछे भाजपा की साफ रणनीति मानी जा रही है। पार्टी महिला, आदिवासी और ओबीसी वर्ग के बीच नया सामाजिक संतुलन बनाना चाहती है। खासकर सरगुजा और बस्तर क्षेत्र को ध्यान में रखकर भविष्य की राजनीति तैयार की जा रही है।

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मंत्रिमंडल में किन चेहरों की चर्चा?

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व को लेकर फिलहाल कोई सवाल नहीं माना जा रहा। केंद्रीय नेतृत्व उनके कामकाज से संतुष्ट बताया जा रहा है। लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की संभावना लगातार बनी हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, 2 से 4 मंत्री पदों पर बदलाव हो सकता है। इस बार पुराने चेहरों की तुलना में नए विधायकों को मौका मिलने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है। भावना बोहरा, पुरंदर मिश्रा, सुशांत शुक्ला और सरगुजा क्षेत्र की किसी महिला आदिवासी विधायक के नाम राजनीतिक चर्चाओं में शामिल हैं।

भाजपा अभी से क्यों कर रही तैयारी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब चुनाव के ठीक पहले बदलाव करने के बजाय समय रहते संगठन और सरकार की परफॉर्मेंस ट्यूनिंग पर काम कर रही है। पार्टी सत्ता में आने के बाद अब दूसरे चरण की रणनीति लागू कर रही है, जिसमें संगठन विस्तार, सामाजिक संतुलन और नए नेतृत्व को तैयार करना सबसे बड़ा लक्ष्य माना जा रहा है।वहीं, कई नेताओं के खिलाफ बढ़ते एंटी इनकंबेंसी माहौल को देखते हुए पार्टी बड़े बदलाव की रणनीति पर काम कर रही है।