रायगढ़/लैलूंगा। छत्तीसगढ़ सरकार की सबसे बड़ी योजना ‘महतारी वंदन’ पर दलालों की नजर लग गई है। इस योजना के हितग्राहियों के KYC का अभियान इन दिनों चल रहा है, जिसका फायदा लोक सेवा केंद्र के संचालक उठा रहे हैं। इनके द्वारा प्रत्येक महिला हितग्राही से 50-50 रुपए की वसूली की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में ऐसे मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं।

रुपए लेने के बाद भी फॉर्म रिजेक्ट

लैलूंगा के मड़िया कछार गांव में KYC अपडेट के नाम पर गरीब ग्रामीणों से जमकर अवैध वसूली का मामला सामने आया है। पैसे लेने के बाद भी दर्जनों महिलाओं के फॉर्म रिजेक्ट हो गए। अब ग्रामीण दर-दर भटक रहे हैं।

ऐसे हुआ गरीबों के हक पर डाका

ग्राम पंचायत गंजपुर के आश्रित गांव मड़िया कछार में दीयागढ़ निवासी हीरालाल पटेल पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हीरालाल ने पार्वती पटेल की आधिकारिक लॉगिन ID का इस्तेमाल कर KYC फॉर्म भरे। इसके बदले हर ग्रामीण से 50-50 रुपये वसूले गए।

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पैसे भी गए, काम भी नहीं हुआ

विवाद तब बढ़ा जब पैसे देने के बाद भी दर्जनों ग्रामीणों की KYC रिजेक्ट हो गई। अब पीड़ितों को दोबारा दूसरे सेंटरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। एक महिला ने बताया, “नियम के खिलाफ पैसे तो लिए ही, काम भी ठीक से नहीं किया। अगर फॉर्म सही भरते तो रिजेक्ट क्यों होता? ये गरीबों के हक पर सीधा डाका है।”

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

आक्रोशित ग्रामीणों ने तहसीलदार लैलूंगा से लिखित शिकायत कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि पार्वती पटेल की ID का दुरुपयोग करने वाले और अवैध वसूली करने वाले हीरालाल पटेल पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

कार्रवाई के बाद भी नहीं चेते CSC संचालक

बता दें कि महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों के KYC के लिए सरकार ने लोक सेवा केंद्र (CSC) संचालकों को जिम्मेदारी दी है और इसके एवज में प्रत्येक हितग्राही एक निश्चित राशि संचालकों को दी जा रही है। बावजूद इसके हितग्राहियों से KYC के नाम पर कम से कम 50–50 रुपए लिए जा रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में शिकायत के बाद कुछ CSC को प्रशासन ने बंद भी करा दिया। बावजूद इसके अधिकांश CSC संचालक अब भी हितग्राहियों से पैसे ले रहे हैं।

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राजधानी में भी पैसे वसूल रहे CSC संचालक

प्रदेश में महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों के KYC के नाम पर गांव तो क्या शहरों में भी CSC केंद्रों में खुलकर पैसे वसूले जा रहे हैं। राजधानी रायपुर भी इस मामले में पीछे नहीं है। यहां भी लोक सेवा केंद्रों के संचालक खुले आम पैसे ले रहे हैं। अगर कोई इसका विरोध करता है तो तर्क दिया जाता है कि सरकार इस काम के एवज में थोड़े से रुपए दे रही है, जिससे केवाईसी का खर्चा भी नहीं निकल पाता। चूंकि महिलाओं को इस योजना के तहत हर महीने 1000 रुपए मिलते हैं, और यह रकम मिलनी बंद न हो जाए, इस डर से महिलाएं CSC संचालकों को पैसे दे रही हैं।

निगरानी तंत्र पर उठे सवाल

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता के दावों के बीच CSC संचालकों द्वारा पैसे की वसूली की तमाम शिकायतों के बावजूद प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। महतारी वंदन जैसी योजना में दलालों की एंट्री और CSC संचालकों की वसूली से गरीब महिलाओं को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है। कायदे से इस योजना से जुड़े नोडल एजेंसी को गोपनीय तौर महिला हितग्राहियों को भेजकर CSC केंद्रों में हो रही वसूली की पुष्टि करते हुए कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, अन्यथा इनके हौसले यूं ही बुलंद रहेंगे।

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