धरमजयगढ़। छाल रेंज के चंद्रशेखरपुर बीट में एक और हाथी शावक की मौत ने वन विभाग की पोल खोल दी है। जंगल में शावक की मौत के बाद हाथियों का पूरा झुंड घंटों वहां डटा रहा और वन विभाग की टीम मूकदर्शक बनी देखती रही। करोड़ों के बजट के बाद भी विभाग के पास आपात स्थिति से निपटने का कोई प्लान नजर नहीं आ रहा है।

घंटों बेबस रहा विभाग, झुंड के आगे नहीं चली एक

सूचना मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा तो जरूर, लेकिन मृत शावक के पास खड़े गजराजों के झुंड के आगे बेबस नजर आया। कई घंटों तक विभाग शव को कब्जे में नहीं ले सका और न ही झुंड को वहां से हटा पाया। सवाल उठ रहा है कि हाथी-मानव संघर्ष रोकने के बड़े-बड़े दावों वाले धरमजयगढ़ वन मंडल के पास इमरजेंसी हैंडल करने की तैयारी क्यों नहीं है?

बंद कमरों में बैठकें, जंगल में मौतें

स्थानीय लोगों का आरोप है कि DFO समेत पूरा अमला सिर्फ कागजी रिपोर्ट और बंद कमरों की बैठकों तक सीमित है। जंगल में लगातार हाथियों की मौत हो रही है, शावक दम तोड़ रहे हैं, लेकिन विभाग पहले से कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाया। वन्यजीव संरक्षण के नाम पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी एक शावक को नहीं बचाया जा सका।

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गौरतलब है कि धर्मजयगढ़ इलाके में अब तक हाथी के कई शावकों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा करंट से बड़ी संख्या में हाथियों की जान जा चुकी है।

जांच की मांग, कौन है जिम्मेदार?शावक की मौत के बाद इलाके में आक्रोश है। लोग पूछ रहे हैं कि लगातार शावकों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है? पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो गई है। वन विभाग के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा फर्क साफ दिख रहा है।