नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने आज बुधवार को एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग की विशेष मतदाता संशोधन यानी SIR प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच (Supreme Court bench) ने साफ किया कि साफ-सुथरी मतदाता सूची तैयार करना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है SIR प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह कहना बिल्कुल गलत है कि चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने अपने दायरे से बाहर जाकर काम किया है। वोटर लिस्ट को पूरी तरह अपडेट रखना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव (free and fair election) कराने का ही एक हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ इसलिए इस प्रक्रिया को गलत नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह सामान्य वोटर वेरिफिकेशन (voter verification process) से थोड़ी अलग है।
इन दिग्गज नेताओं ने दायर की थी याचिकाएं
इस मामले में 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित (judgment reserved) रख लिया था। यह विवाद जून 2025 में तब शुरू हुआ जब चुनाव आयोग ने बिहार में SIR कराने का फैसला लिया। इसके खिलाफ ‘द एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR), योगेंद्र यादव, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, आरजेडी सांसद मनोज झा और कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल समेत कई बड़े नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कई राज्यों में प्रक्रिया पूरी
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इस प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में यह काम पहले ही पूरा हो चुका है। वहीं उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में अभी यह काम तेजी से चल रहा है।
पहचान पत्र को लेकर कोर्ट का पुराना निर्देश
पिछले साल सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा निर्देश (Supreme Court directions) दिया था। कोर्ट ने कहा था कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए पहचान पत्र के तौर पर 12वें दस्तावेज के रूप में कार्ड स्वीकार किया जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया था कि यह नागरिकता का प्रमाण (proof of citizenship) नहीं होगा और अधिकारी इसकी प्रामाणिकता की जांच कर सकते हैं।


