टीआरपी। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले को इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को ‘विशेष रेल परियोजना’ के रूप में अधिसूचित कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के लगातार प्रयासों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की इस मंजूरी से जशपुरवासियों का दशकों पुराना सपना अब सच होने जा रहा है।
यह परियोजना केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि वनांचल क्षेत्र जशपुर के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास का नया टर्निंग पॉइंट साबित होगी। अब तक केवल सड़क मार्ग पर निर्भर रहने वाले इस आदिवासी बाहुल्य जिले के किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और मरीजों को सीधे देश के बड़े शहरों तक सुलभ, सुरक्षित और बेहद किफायती परिवहन की सुविधा मिलेगी।
विकास के नए युग की शुरुआत
भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस परियोजना को रेल अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय अवसंरचना विकास को ध्यान में रखते हुए विशेष दर्जा दिया गया है। यह महत्वाकांक्षी रेल लाइन लगभग 291.881 किलोमीटर लंबी होगी, जो रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से शुरू होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए पड़ोसी राज्य झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगी। अधिसूचना जारी होने के साथ ही इस पर जमीनी काम की औपचारिक शुरुआत हो गई है।
इस रेल लाइन के आने से जशपुर के प्रसिद्ध कृषि व उद्यानिकी उत्पाद जैसे जैविक धान, सुगंधित चावल, मक्का, दलहन और बागवानी फसलों को देश के बड़े बाजारों में सही दाम और कम परिवहन लागत पर पहुंचाया जा सकेगा। इसके अलावा, जशपुर की अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, जलप्रपातों और धार्मिक स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच आसान होने से स्थानीय स्तर पर होटल, हस्तशिल्प और रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने वाले युवाओं और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े अस्पतालों का रुख करने वाले मरीजों के लिए यह लाइफलाइन साबित होगी।
कुल लंबाई: लगभग 291.881 किलोमीटर लंबी होगी नई रेल लाइन।
रूट मैप: रायगढ़ का धरमजयगढ़ ➡️ जशपुर का पत्थलगांव ➡️ झारखंड का लोहरदगा (सीधे नेशनल नेटवर्क से जुड़ाव)।
कानूनी दर्जा: रेल अधिनियम, 1989 के तहत केंद्र सरकार द्वारा ‘विशेष रेल परियोजना’ के रूप में अधिसूचित।
अधिसूचना जारी होने के बाद अब रेलवे प्रशासन द्वारा जल्द ही इस रूट के लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) और तकनीकी सर्वे की अंतिम प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके बाद जशपुर की धरती पर पटरियां बिछाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू होगा।




