अम्बिकापुर।  सरगुजा के उदयपुर स्थित रामगढ़ में ‘रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति’ की परिचर्चा में पूर्व डिप्टी CM टी.एस. सिंहदेव ने चेताया कि केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को मंजूरी से ऐतिहासिक रामगढ़ का अस्तित्व संकट में आ गया है। इस मौके पर खदानों और पर्यावरण को लेकर कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

सिंहदेव बोले- नीतियां कॉर्पोरेट के पक्ष में

पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तेज है। कांग्रेस सरकार के समय डॉ. रमन सिंह की मांग पर उदयपुर-हसदेव में सिर्फ एक खदान को अनुमति मिली थी। अब कई नई खदानें चिन्हांकित हैं। केते एक्सटेंशन से रामगढ़ पर खतरा है। सरकार खुद मानती है कि रामगढ़ में दरारें आ रही हैं, बचाव के बोर्ड भी लगे हैं। उन्होंने लोगों से एकजुट संघर्ष का आह्वान किया।

आदिवासी हितों की अनदेखी : दीपक बैज

PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने इस मौके पर कहा कि आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन पर संकट आया है। वीर नारायण सिंह और गुंडाधूर जैसे संघर्ष की जरूरत है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई हो रही है। बस्तर से सरगुजा तक गांधीवादी तरीके से अधिकारों की रक्षा करनी होगी।

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7 लाख पेड़ों पर खतरा

हसदेव बचाव मंच के आलोक शुक्ला ने बताया कि केते एक्सटेंशन से 5,000 एकड़ में 7 लाख पेड़ प्रभावित होंगे। भकूरमा और तारा कोल क्षेत्र में भी 20,000 एकड़ में कटाई संभावित है। इससे जल स्रोत खत्म होंगे। कोरबा-बिलासपुर तक जल संकट गहरा सकता है।

ग्रामीणों में डर- हवाई सर्वे क्यों?

उदयपुर ब्लॉक के ग्रामीणों ने हवाई सर्वे पर चिंता जताई। आशंका है कि सर्वे वाले क्षेत्रों में नई खदानें खुलेंगी। 

यूथ कांग्रेस प्रभारी मनीष शर्मा ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था ‘कंपनी राज’ जैसी है। संसाधनों पर जनता का हक है। सर्व आदिवासी समाज के विनोद नागवंशी बोले कि स्थानीय लोग खनिज धरती पर रहकर भी बेरोजगार हैं, आवाज उठाने पर कार्रवाई होती है।

इस परिचर्चा में सिद्धार्थ सिंहदेव, राजनाथ सिंह, ओम प्रकाश सिंह, अनिल अग्रवाल रायगढ़, सुनीता पोर्ते हरिहरपुर, गंगा राम पैंकरा, ए.आर. कोरार्म, सुदेश टिकम समेत उदयपुर, लखनपुर, अम्बिकापुर, सीतापुर, सूरजपुर से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

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