प्रतापपुर/सूरजपुर। प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के पार्वतीपुर, झींगरा माड़ा उपका पारा के जंगल में दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां 11 केवी हाईटेंशन लाइन का तार टूटकर गिरने से करंट लगने से दो वयस्क भालू और एक शावक की मौत हो गई। तीनों की मौके पर ही जान चली गई।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के मुताबिक जंगल में गिरे 11 केवी बिजली के तार की चपेट में आने से भालू परिवार खत्म हो गया। घटना की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच शुरू कर दी गई है। 

वन विभाग के अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे हैं। पता लगाया जा रहा है कि तार किन हालात में टूटकर जंगल में गिरा। बिजली विभाग से भी जानकारी लेकर कार्रवाई की जा रही है। भालुओं के शवों का पंचनामा और पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: ‘क्या हादसे का इंतजार था?’

ग्रामीणों ने वन और बिजली विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जंगलों से गुजरने वाली बिजली लाइनों की नियमित निगरानी नहीं होती। समय पर सुरक्षा जांच भी नहीं कराई जाती। 

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स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगह तार झूल रहे हैं। खंभों की हालत भी खराब है। समय रहते निरीक्षण और मरम्मत होती तो आज भालू परिवार जिंदा होता।

वन विभाग पर भी सवाल

वन्यजीवों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले वन विभाग पर भी सवाल उठ रहे हैं। जंगलों में वन्यजीवों की लगातार निगरानी की बात कही जाती है। फिर हाई वोल्टेज तार जमीन पर पड़ा होने के खतरे को चिन्हित क्यों नहीं किया गया? क्या विभागीय तंत्र सिर्फ कागजों में सक्रिय है?

बार-बार दोहरा रहे हादसे

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों से गुजरने वाली लाइनों का वन और बिजली विभाग को संयुक्त निरीक्षण करना चाहिए। संवेदनशील इलाकों में इंसुलेटेड तार, चेतावनी प्रणाली और तुरंत मरम्मत की व्यवस्था जरूरी है। लेकिन जमीन पर ऐसी व्यवस्था नहीं दिखती। 

यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी हाथी, भालू और अन्य दुर्लभ वन्यजीव बिजली तारों और अवैध करंट का शिकार हो चुके हैं। हर बार जांच की बात होती है, लेकिन हालात नहीं सुधरते।

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