धमतरी। भीषण गर्मी की वजह से छत्तीसगढ़ के जंगलों में सूखे का संकट गहरा गया है। इसी बीच उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से राहत और खतरे की दो बड़ी खबरें आई हैं। एक तरफ पानी के 800 कृत्रिम झिरिया वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी बनीं, तो दूसरी तरफ इनमें जहर मिलाकर शिकार की साजिश रच रहे ओडिशा के 7 शिकारी पकड़े गए हैं।
झिरिया में नन्हे शावकों संग नहाते दिखे हाथी
कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र में इंसानी सूझबूझ से बनाई गई झिरिया में हाथियों के कुनबे को नन्हे शावकों के साथ जलक्रीड़ा करते देखा गया। समुद्र तल से करीब 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस झिरिया का वीडियो सामने आया है।

DFO वरुण जैन ने मीडिया को बताया कि सुपर एल-नीनो या गॉडज़िला एल-नीनो के कारण जंगलों में जलस्तर तेजी से गिरा है। वन्यजीव पानी की तलाश में आबादी में न आएं और संघर्ष न हो, इसके लिए विभाग ने अनूठी पहल की।
जंगल के भीतर रेतीली परतों को खोदकर भूमिगत जल संवर्धन तकनीक से 800 से ज्यादा पारंपरिक झिरिया बनाई गईं। साथ ही 34 सोलर पंप भी लगाए गए हैं।
पानी में जहर मिलाने की थी साजिश
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग की एंटी-पोचिंग टीम की मुस्तैदी से बड़ी तबाही टल गई। टीम ने ओडिशा के सीमावर्ती गांव कटफाड़, कुसुमखुंटा और खिपरीमाल के 7 अंतरराज्यीय शिकारियों को रंगे हाथों पकड़ा।

आरोपी झिरियाओं के पानी में घातक जहर मिलाने की फिराक में थे। मकसद था पानी पीने आने वाले हाथियों, बाघों और अन्य वन्यजीवों का सामूहिक शिकार करना। समय पर कार्रवाई से रिजर्व में बड़ा हादसा टल गया।
तकनीक से हो रही निगरानी
बता दें कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व बेहद संवेदनशील है। इसके दायरे में करीब 100 ग्रामीण बस्तियां आती हैं। वन्यजीवों और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग, मुस्तैद फील्ड स्टाफ और अर्ली वार्निंग सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है।
हाथियों के मूवमेंट की रियल-टाइम मॉनिटरिंग कर गांवों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक इस भीषण गर्मी में पानी से लबालब ये झिरियाएं बेजुबानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं।



