रायपुर नगर निगम को केंद्र से मिलने वाली ₹220 करोड़ की ड्रेनेज राशि 2 साल से अटकी। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने घेरा

टीआरपी। रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने राजधानी में मॉनसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या को लेकर नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया है कि केंद्र सरकार से रायपुर नगर निगम के ड्रेनेज सिस्टम के लिए मिलने वाली 220 करोड़ रुपये की राशि पिछले दो साल से क्यों अटकी हुई है।

यह मामला रायपुर के नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से सीधा जुड़ा है। हर साल बारिश के मौसम में राजधानी के कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। यदि यह राशि समय पर मिल जाती, तो स्थाई ड्रेनेज सिस्टम बनने से शहरवासियों को इस गंभीर समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल सकती थी।

ड्रेनेज सिस्टम पर सियासत और सवाल

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि रायपुर में जलभराव से निपटने के लिए हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ नियंत्रक प्रकोष्ठ का गठन कर सभी जोनों को जिम्मेदारी दी गई है, जो कि अच्छी बात है। लेकिन उन्होंने सवाल किया कि इस समस्या का स्थाई निदान कब होगा? महापौर और निगम आयुक्त को केंद्र सरकार से मिलने वाली 220 करोड़ रुपये की राशि लाने के लिए ठोस पहल करनी चाहिए थी, ताकि इस बरसात में शहर को डूबने से बचाया जा सकता।

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उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज प्रदेश से लेकर केंद्र तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है। रायपुर में भाजपा के ही महापौर, नगरीय प्रशासन मंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्र में प्रधानमंत्री हैं। इस ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार होने के बावजूद रायपुर नगर निगम को अपने हक के पैसे के लिए दो साल से इंतजार करना पड़ रहा है, जो बेहद दुखद और चिंता का विषय है। सही समय पर प्रबंधन न होने के कारण जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

अटकी हुई राशि: केंद्र सरकार से रायपुर ड्रेनेज सिस्टम के लिए ₹220 करोड़ की राशि स्वीकृत होनी थी।

देरी का समय: पिछले 2 वर्षों से यह राशि तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से अटकी हुई है।

प्रशासनिक व्यवस्था: वर्तमान में जलभराव से अस्थाई राहत के लिए नगर निगम ने बाढ़ नियंत्रक प्रकोष्ठ का गठन किया है।

नेता प्रतिपक्ष के इस हमले के बाद अब नगर निगम प्रशासन और नगरीय प्रशासन विभाग पर केंद्र से अटकी राशि को जल्द से जल्द रिलीज कराने का दबाव बढ़ेगा। देखना होगा कि इस मॉनसून में रायपुर को जलभराव से बचाने के लिए सरकार क्या आपातकालीन कदम उठाती है।

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