टीआरपी डेस्क। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आज देशव्यापी स्तर पर अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली प्रशासनिक कार्रवाई की है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के नाम पर देश और दुनिया भर के मासूम लोगों को डराकर करोड़ों रुपये ऐंठने वाले इंटरनेशनल साइबर ठगों के खिलाफ सीबीआई ने ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ (Operation Chakra-6) छेड़ दिया है। देश के 16 राज्यों में एक साथ 80 से ज्यादा ठिकानों पर सुबह-सुबह शुरू हुई इस भयंकर छापेमारी से पूरे देश के प्रशासनिक और सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।
60 स्पेशल टीमें, 16 राज्य और 80 ठिकाने
इंटरनेशनल साइबर क्राइम के इस मजबूत बुनियादी ढांचे और नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए सीबीआई ने 60 विशेष फॉरेंसिक और इनवेस्टिगेशन टीमों का गठन किया था। इन टीमों ने एक ही समय पर पंजाब, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा समेत 16 राज्यों में धावा बोला। कलेक्ट्रेट और दिल्ली के सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई देश में डिजिटल अरेस्ट स्कैम के 200 से अधिक मामलों के तार आपस में जुड़े होने के बाद की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के नाम पर बनाई थी हूबहू नकली वेबसाइट
सीबीआई की इस जांच में एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने देश की सर्वोच्च अदालत को भी हैरान कर दिया था। दरअसल, इस शातिर गैंग ने सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती हूबहू एक फर्जी वेबसाइट (URL) बना रखी थी। इसी के जरिए वे आम लोगों को सुप्रीम कोर्ट और अन्य बड़ी केंद्रीय जांच एजेंसियों के फर्जी अदालती आदेश, अरेस्ट वारंट और मनगढ़ंत दस्तावेज भेजकर डराते थे और खुद को असली कानून प्रवर्तन अधिकारी बताते थे।
सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद सीबीआई ने मुख्य एफआईआर दर्ज कर यह जाल बिछाया। इस महा-ऑपरेशन के दौरान सीबीआई ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए शेल (फर्जी) कंपनियां बनाने और अवैध बैंक खाते खोलने वाले दो बड़े संदिग्ध मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है।
छापेमारी में अब तक क्या-क्या मिला:
फॉरेंसिक टूल्स का इस्तेमाल: एडवांस्ड टेक्निकल टूल्स के जरिए भारत और विदेशों में बैठे इस नेटवर्क के बड़े हैंडलर्स की पहचान हो चुकी है।
दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त: छापेमारी के दौरान करोड़ों के बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, दर्जनों मोबाइल फोन, लैपटॉप और फर्जी अदालती आदेशों के पुलिंदे जब्त किए गए हैं।
विदेशी नागरिक भी बने शिकार: जांच में पुख्ता सबूत मिले हैं कि इस डिजिटल अरेस्ट गैंग ने न सिर्फ भारतीय नागरिकों को लूटा, बल्कि कई विदेशी नागरिकों को भी अपना शिकार बनाकर करोड़ों डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग की है।


