बालोद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में हाल ही में हुई सपोर्ट स्टाफ, डाटा एंट्री ऑपरेटर और डेंटल असिस्टेंट पदों की भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी 10 संदिग्ध चयनितों की जांच शुरू नहीं हुई है, जबकि एक महिला अभ्यर्थी के अचानक इस्तीफे ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
फर्जी अनुभव पत्र और मेरिट में हेरफेर के आरोप
18 मई 2026 को बालोद नगर के वार्ड-10 निवासी संजीव मणि नायर ने जिला पंचायत CEO और स्वास्थ्य विभाग को शिकायत सौंपी थी। आरोप है कि अंतिम मेरिट सूची में कुछ अभ्यर्थियों को वास्तविक योग्यता से अधिक अंक दिए गए, जिससे ज्यादा योग्य उम्मीदवार बाहर हो गए। साथ ही अनुभव प्रमाण पत्रों का मूल नियुक्ति आदेश, बैंक में वेतन भुगतान या ट्रेजरी रिकॉर्ड से सत्यापन किए बिना ही अतिरिक्त अंक दे दिए गए।
11 में से 1 ने दिया इस्तीफा, 10 की जांच अब तक शुरू नहीं
शिकायत में 11 चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाण पत्रों पर संदेह जताया गया था। इनमें से एक अभ्यर्थी ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन शेष 10 चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच अब तक शुरू नहीं हुई है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से 41 दिन बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने न आने से भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
नियमों की अनदेखी से पारदर्शिता पर सवाल
आरोप है कि भर्ती में नियमों की अनदेखी की गई और फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों को बिना वेरिफिकेशन मान्य कर लिया गया। एक चयनित अभ्यर्थी के अचानक इस्तीफे के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।



